अगरतला , जनवरी 10 -- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने भारत विकास ग्रामीण रोजगार मिशन गारंटी (बीवी-जी राम-जी) अधिनियम को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है जबकि विपक्षी दल माकपा ने मोदी सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।

डॉ. साहा ने एक बयान में कहा कि यह पहल ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बनाई गई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नया कानून रोजगार गारंटी कार्यक्रम में जवाबदेही को बढ़ाएगा, जो पहले मनरेगा में नहीं थी।

मुख्यमंत्री ने कहा, "संसद ने पहले ही बीवी-जी राम-जी अधिनियम पारित कर दिया है और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसका उद्देश्य पूर्ववर्ती योजनाओं की कमियों को दूर करना है। हालांकि विपक्ष इसके प्रावधानों और लाभों को कमतर बताकर जनता को गुमराह करने के लिए अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है।"इसके विपरीत, माकपा के राज्य सचिव और नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने भाजपा पर देश की सबसे महत्वपूर्ण रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक को कमजोर करने का आरोप लगाया।

श्री चौधरी ने कहा, "मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनरेखा रही है, जिसने हर वर्ष 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया। मोदी सरकार शुरू से ही इसका विरोध करती रही है और त्रिपुरा में भाजपा के कुप्रबंधन ने इस योजना को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।"उन्होंने सरकार पर योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए इसे "अत्यंत अपमानजनक कदम" बताया और कहा कि यह एक ऐतिहासिक कल्याणकारी विरासत को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश है।

सरकार जहां यह दावा कर रही है कि नए कानून के तहत कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 किए जाएंगे, वहीं श्री चौधरी ने इस दावे को "पूरी तरह झूठा" करार दिया। उन्होंने मनरेगा के तहत वर्षों से पूरे न हुए वादों का हवाला दिया।

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