अगरतला , अप्रैल 06 -- त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) के चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को निशाना बनाने वाली हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू हो गयी है।
आरोप है कि इन घटनाओं को सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी टिपरा स्वदेशी प्रगतिशील क्षेत्रीय गठबंधन (टीआईपीआरए मोथा) के समर्थकों ने भड़काया है। यह अशांति विशेष रूप से आदिवासी इलाकों में बढ़ते तनाव को उजागर करती है, जहां उम्मीदवार प्रचार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आदिवासी कल्याण मंत्री विकास देबबर्मा को पिछले दो सप्ताह में कई बार अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार करते समय विरोध का सामना करना पड़ा। रविवार की रात मुंगियाकामी की यात्रा के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गयी कि उन्हें एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीआईपीआरए मोथा के समर्थकों ने उस घर को घेर लिया था, जहां वे निवासियों से मिल रहे थे।
विरोध तेजी से बढ़ा, जिसका अंत पत्थरबाजी और मंत्री को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने के प्रयासों में हुआ। वे, हालांकि उस जगह से भागने में सफल रहे और पास के एक थाना में शरण ली।
इसी तरह की परेशानियों का सामना उच्च शिक्षा मंत्री किशोर बर्मन को सेपाहिजाला जिले के उनके नलछार निर्वाचन क्षेत्र में करना पड़ा। एडीसी गांवों में प्रचार करते समय श्री बर्मन को दो बार विरोध का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें पीछे हटना पड़ा।
भाजपा के उम्मीदवारों अनंत देबबर्मा, माझी देबबर्मा और डेविड देबबर्मा ने भी प्रचार के दौरान हमलों की सूचना दी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार विभिन्न एडीसी क्षेत्रों में भाजपा के लगभग 50 कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी है।
पुलिस ने हालांकि शिकायतें दर्ज कर ली हैं, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
एक अन्य मामले में भाजपा उम्मीदवार माझी देबबर्मा रविवार को पेकुअजरजाला-जनमेजय नगर एडीसी निर्वाचन क्षेत्र के तहत नबाशांतिगंज में घर-घर जाकर प्रचार करते समय हुए एक हमले में गंभीर रूप से घायल हो गयीं।
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