अगरतला , फरवरी 11 -- त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने नाबालिग लड़की प्रतीती चक्रवर्ती को उसकी मां प्रभा रानी दास को तुरंत लौटाने का आदेश दिया जिसे वेल्लोर के एक अस्पताल सीएमसी ने अपनी निगरानी में तमिलनाडु के आश्रय स्थल 'होप हाउस' में रखा हुआ है।
उच्च न्यायालय ने यह मानते हुए आदेश दिया कि तमिलनाडु के एक बाल कल्याण संस्थान में उसका और रहना अनधिकृत है और अवैध हिरासत के समान है। न्यायमूर्ति टी अमरनाथ गौड़ और न्यायमूर्ति एस दत्त पुरकायस्थ की खंडपीठ ने तमिलनाडु के आश्रय स्थल 'होप हाउस' को उचित स्वीकृति के साथ उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया।
राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह 15 फरवरी तक बच्चे को वापस लाने के लिए मां के साथ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को भेजे। होप हाउस, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर समेत तमिलनाडु के अधिकारियों को न्यायालय के फैसले को लागू करने में मदद करने का आदेश दिया गया।
यह मामला एक नाबालिग को सीएमसी वेल्लोर और 'होप हाउस' की ओर से अवैध और जबरन हिरासत में रखने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के वकील पी के विश्वास ने बताया कि याचिकाकर्ता ने इस मामले की जांच और उनाकोटि के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास पहले से दर्ज शिकायत की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अदालत ने पाया कि सीएमसी वेल्लोर में नाबालिग के इलाज के बाद 2022 से चल रही कानूनी कार्यवाही के बावजूद न्यायिक अनुमोदन के बिना उसकी अभिरक्षा 'होप हाउस' को सौंप दी गयी थी। इस कार्रवाई को अनधिकृत, मनमाना और कानूनी अधिकार का उल्लंघन माना गया। याचिकाकर्ता ने अपनी बेटी से अलग होने के कारण हुए मानसिक कष्ट का उल्लेख किया जो संबंधित भावनात्मक सदमे के कारण उसके पति की मृत्यु से और भी गहरा गया था।
अदालत ने स्थिति की गंभीरता को पहचाना और बच्चे के कल्याण के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, अदालत ने अपने आदेशों का पालन न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी। एक बार जब बच्ची को त्रिपुरा वापस लाया जायेगा, तो राज्य के अधिकारियों को उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का आकलन करना होगा और आवश्यक सहायता प्रदान करनी होगी।
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