कानपुर , मार्च 11 -- उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले में नरवल तहसील के बिधनू ब्लॉक स्थित नगवां गांव में एक परिवार पर आई लगातार त्रासदियों के बीच दो मासूम भाई-बहन को प्रशासन का सहारा मिला है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के हस्तक्षेप से दोनों बच्चों की जिंदगी में फिर से उम्मीद जगी है। नगवां गांव की दिव्यांशी सिंह (21) और उसका छोटा भाई हर्षित सिंह (13) बीते कई महीनों से गंभीर पारिवारिक संकट का सामना कर रहे थे। अप्रैल 2025 में उनकी मां मधु का निधन हो गया था। मां के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। इसी बीच शराब के आदी पिता मनोज सिंह ने दिव्यांशी की शादी एक ऐसे युवक से तय कर दी जो शराब का आदी बताया जाता है। इस निर्णय से आहत छोटी बहन शानू ने जनवरी 2026 में आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पिता भी घर से लगभग अलग हो गए, जिससे दिव्यांशी और हर्षित पूरी तरह अकेले पड़ गए। ग्राम प्रधान आशीष वाजपेयी ने परिवार की स्थिति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने दोनों बच्चों से अभिभावक की तरह संवाद कर उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है। इसके बाद उनके घर की मरम्मत और रंग-रोगन कराया गया तथा पात्रता के आधार पर अंत्योदय राशन कार्ड बनवाया गया, जिससे उन्हें नियमित खाद्यान्न मिल सके।

दोनों बच्चों के आयुष्मान कार्ड भी बनवाए गए हैं और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही तत्काल राहत के रूप में राशन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। परिवार से जुड़ी एक अन्य समस्या भी जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से सुलझ गई। भूमि विक्रय के बदले मिलने वाली लगभग साढ़े चार लाख रुपये की राशि एक व्यक्ति लंबे समय से देने में टालमटोल कर रहा था। जिलाधिकारी के निर्देश पर पहल करते हुए यह धनराशि बच्चों के खाते में दिलाई गई।

गत शनिवार संपूर्ण समाधान दिवस से लौटते समय जिलाधिकारी स्वयं नगवां गांव पहुंचे और दिव्यांशी व हर्षित से मुलाकात कर उन्हें होली का उपहार दिया तथा उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बच्चों से कहा कि विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और साहस के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

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