हैदराबाद , नवंबर 11 -- तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद के रवींद्र भारती ऑडिटोरियम में मंगलवार को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस और अल्पसंख्यक कल्याण दिवस मनाया गया।

इस अवसर पर स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री एवं भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

कार्यक्रम का आयोजन तेलंगाना सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा किया गया था। अल्पसंख्यक कल्याण एवं लोक उद्यम मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस मौलाना आज़ाद को श्रद्धांजलि अर्पित की और शिक्षा एवं राष्ट्रीय प्रगति के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

श्री अजहरूद्दीन ने अधिकारियों से कल्याणकारी पहलों को मजबूत करने के लिए तत्परता और समन्वय के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने अल्पसंख्यकों के लिए शैक्षिक पहुँच, सशक्तिकरण कार्यक्रमों और समान अवसरों के विस्तार पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहरायी।

सरकारी सलाहकार और मुख्य अतिथि मोहम्मद अली शब्बीर ने बताया कि मौलाना आज़ाद ने स्वतंत्रता के बाद शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व इसलिए चुना क्योंकि उनका मानना था कि शिक्षा राष्ट्र निर्माण की नींव रखती है। उन्होंने कुरान की आयत 'इकरा' (पढ़ो) का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी धर्म सीखने के महत्व पर ज़ोर देते हैं।

श्री शब्बीर ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में नामांकन और उपस्थिति बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी छात्र शिक्षा प्रणाली से वंचित न रहे।इस अवसर पर, तेलंगाना उर्दू अकादमी ने उर्दू साहित्य और संस्कृति में योगदान देने के लिए 18 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को पुरस्कार प्रदान किए। इनमें 2.25 लाख रुपये के दो मौलाना अबुल कलाम आज़ाद राष्ट्रीय पुरस्कार, 2 लाख रुपये का मख़दूम पुरस्कार और वर्ष 2024 और 2025 के लिए 50,000 रुपये के 15 आजीवन उपलब्धि पुरस्कार शामिल हैं।

पुरस्कार विजेताओं में पत्रकारिता, कविता, शिक्षा, शोध, आलोचना, समाज सेवा, कथा साहित्य और साहित्य जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

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