हैदराबाद , जनवरी 05 -- तेलंगाना के सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार पोलावरम-नल्लामाला सागर लिंक परियोजना का सभी मंचों पर विरोध कर रही है और यह परियोजना अंतर-राज्यीय जल बंटवारे के नियमों का उल्लंघन करती है तथा तेलंगाना के जल अधिकारों के लिए खतरा है।

विधानसभा परिसर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड (जीआरएमबी), पोलावरम परियोजना प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर अवगत कराया है कि यह परियोजना गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण (जीडब्ल्यूडीटी) के 1980 के निर्णय और स्थापित अंतर-राज्यीय जल नियमों का उल्लंघन करती है।

उन्होंने दावा किया कि संबंधित प्राधिकरणों ने तेलंगाना के दृष्टिकोण से सहमति जताई है। श्री रेड्डी ने पूर्व भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जल संसाधनों के गंभीर कुप्रबंधन के कारण राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

उन्होंने आंध्र प्रदेश की पोलावरम-नल्लामाला सागर लिंक के माध्यम से गोदावरी की बाढ़ के पानी को मोड़ने की योजना का कांग्रेस सरकार द्वारा कड़ा विरोध दोहराया और कहा कि परियोजना को रोकने के लिए कानूनी प्रयास जारी हैं। बीआरएस नेता टी. हरीश राव द्वारा किए गए दावों को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि जिस पत्र का हवाला दिया जा रहा है, वह केवल सीडब्ल्यूसी अधिकारियों के बीच आंतरिक पत्राचार था और इसे परियोजना की मंजूरी नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि 4 दिसंबर को जारी सीडब्ल्यूसी के पत्र में तेलंगाना की आपत्तियों को सही ठहराया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना का विरोध करने में तेलंगाना अकेला नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र और कर्नाटक ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। राज्य के पक्ष को मजबूत करने के लिए सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को उच्चतम न्यायालय में पैरवी के लिए नियुक्त किया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई अगले सोमवार तक स्थगित कर दी है और सलाह दी है कि इसे रिट याचिका के बजाय वाद याचिका के रूप में दायर किया जाए।

श्री रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार फिर से परियोजना पर रोक लगाने की मांग करेगी और वह स्वयं सुनवाई में उपस्थित रहने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि कानूनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए शीघ्र ही विशेषज्ञों के साथ एक और बैठक की जाएगी।

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