हैदराबाद , जनवरी 04 -- तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने को विशाखापट्टनम में स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस हिमगिरि का दौरा किया और कलवरी-क्लास पनडुब्बी के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने भारतीय नौसेना की बढ़ती स्वदेशी क्षमताओं और पूर्वी नौसेना कमान की उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों की सराहना की।
रक्षा विभाग ने रविवार को जारी बयान में कहा, यह दौरा राज्य नेतृत्व और राष्ट्र की समुद्री रक्षा बलों के बीच मजबूत होती सहयोग को रेखांकित करता है। इसके साथ ही भारत की नौसैनिक इंजीनियरिंग और युद्ध तैयारी की अत्याधुनिक झलक प्रदान करता है।
फ्रंटलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी यात्रा के दौरान राज्यपाल को जहाजों की परिष्कृत बहु-मिशन क्षमताओं, उन्नत स्टेल्थ विशेषताओं और एकीकृत युद्ध प्रणालियों के बारे में जानकारी दी गई, जो आधुनिक नौसैनिक युद्ध में प्रभावी समुद्री निगरानी और प्रभुत्व स्थापित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि ये प्लेटफॉर्म क्षेत्र में विकसित होती सुरक्षा चुनौतियों का तेजी से जवाब देने में नौसेना की क्षमता को बढ़ाते हैं।
राज्यपाल को इन युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण एवं संचालन में स्वदेशी तकनीकों के व्यापक उपयोग से भी अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि घरेलू डिज़ाइन, विकास और उत्पादन पर बढ़ता जोर भारत की रक्षा विनिर्माण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह भारतीय उद्योग के साथ नवाचार एवं सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राज्यपाल ने दौरे के समापन पर पूर्वी नौसेना कमान और पूर्वी बेड़े के कर्मियों की व्यावसायिकता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा और निरंतर समुद्री सतर्कता बनाए रखने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की।
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