हैदराबाद , नवंबर 13 -- तेलंगाना की साइबराबाद पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय जीएसटी धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है जिसने दस फर्जी जीएसटी-पंजीकृत फर्में बनाईं तथा धोखाधड़ी से 11.79 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल किया।

पुलिस ने बताया कि शहर के अबिड्स निवासी सोहिल मुरादाली लखानी उर्फ सोनू (34), जो मूल रूप से गुजरात के भावनगर गुजरात का रहने वाला है जो इस घोटाले का आयोजक और वित्तीय संचालक है। एक अन्य संदिग्ध हैदराबाद स्थित दस्तावेज़ कूरियर मोहम्मद अकरम हसनुद्दीन है। दोनों को बुधवार को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस उपायुक्त (आर्थिक अपराध शाखा, साइबराबाद) ए. मुथ्यम रेड्डी ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि गिरोह का मास्टरमाइंड व दिल्ली निवासी अब्दुल्ला, तकनीकी विशेषज्ञ सैयद मुज्तबा हुसैनी उर्फ आजम और तकनीकी ऑपरेटर आयती राजा शेखर फरार हैं।

श्री रेड्डी ने बताया कि ये फर्म असल में कभी अस्तित्व में ही नहीं थीं बल्कि फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके फ़र्ज़ी चालान और मनगढ़ंत टर्नओवर दिखाने के लिए बनाई गई थीं। उन्होंने बताया कि इन फर्जी संस्थाओं का इस्तेमाल करके आरोपियों ने धोखाधड़ी से 11,79,76,284 मूल्य के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किया और उसे आगे बढ़ाया जिससे सरकार को भारी नुकसान हुआ। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने कई राज्यों में एक सुनियोजित नेटवर्क फैला रखा था।

इस गिरोह ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट और अन्य फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और बड़े पैमाने पर जीएसटी धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करके सरकारी पोर्टलों में हेराफेरी की।

पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने बदले हुए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट, जीएचएमसी लाइसेंस और श्रम विभाग के प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करके फर्जी पहचान बनाकर 10 फर्जी जीएसटी-पंजीकृत फर्म बनाईं।

इन फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके, उन्होंने झूठे नामों से सिम कार्ड हासिल किए और जीएसटी पोर्टल पर ओटीपी-आधारित सत्यापन पूरा किया, जिससे उन फर्मों के लिए जीएसटी नंबर सफलतापूर्वक पंजीकृत हो गए जो असल में कभी अस्तित्व में ही नहीं थीं।

नकली जीएसटी नंबर प्राप्त करने के बाद उन्होंने फर्जी खरीद और बिक्री चालान तैयार किए, फर्जी टर्नओवर बनाए और बिना किसी माल की भौतिक आवाजाही के आईटीसी का दावा किया। इस धोखाधड़ी को बढ़ावा देने के लिए आरोपियों ने छेड़छाड़ किए गए चेसिस विवरण के साथ असली वाहन नंबरों का उपयोग करके नकली ई-वे बिल बनाए।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस घोटाले में तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, हरियाणा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गुजरात सहित आठ राज्यों की लगभग 52 कंपनियां शामिल हैं।

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