हैदराबाद , फरवरी 24 -- प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के चार सबसे कुख्यात माओवादी सदस्यों ने मंगलवार को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और मुख्यधारा में शामिल हो गए।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी. शिवधर रेड्डी ने एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पोलित ब्यूरो सदस्य टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवुजी उर्फ कुम्मा दादा और केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम मुख्यधारा में लौट आए हैं, जिससे संगठन का शीर्ष नेतृत्व प्रभावी रूप से ध्वस्त हो गया है। इसी के साथ, इसके सचिव बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर उर्फ जगन और राज्य समिति सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नू दादा के आत्मसमर्पण के बाद तेलंगाना राज्य समिति निष्क्रिय हो गई है।

लगभग 44 वर्षों तक भूमिगत रहा जगित्याल जिले का निवासी देवुजी (62) केंद्रीय सैन्य आयोग का प्रभारी था और 'अभय' नाम से संगठन के प्रवक्ता के रूप में भी कार्य करता था। पेड्डापल्ली जिले के संग्राम (76) ने 46 साल भूमिगत होकर बिताया। वह दंडकारण्य, महाराष्ट्र और ओडिशा क्षेत्रों में अभियानों के मार्गदर्शन भूमिका निभाता था। मुलगु जिले का दामोदर (47) तेलंगाना राज्य समिति का प्रमुख था और राज्य में सैन्य मामलों के प्रभारी था। आंध्र प्रदेश निवासी गंगन्ना (62) ने पीएलजीए की पहली बटालियन के राजनीतिक शिक्षा सलाहकार के रूप में और बाद में तेलंगाना में राज्य समिति सदस्य के रूप में कार्य किया।

डीजीपी ने कहा कि आत्मसमर्पण करने का निर्णय मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा 21 अक्टूबर, 2025 को की गई उस अपील के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने माओवादी कैडरों से हिंसा त्यागने और राज्य के विकास में भाग लेने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि बढ़ते वैचारिक मतभेद, आंतरिक संघर्ष, नेतृत्व के बीच मतभेद और विचारधारा एवं जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती दूरी ने संगठन को भीतर से कमजोर कर दिया है।

तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले चारों सदस्यों को चेक और डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से 90 लाख रुपये के इनाम वितरित किए गए। देवुजी और संग्राम पर 25-25 लाख रुपये का इनाम था, जबकि दामोदर और गंगन्ना पर 20-20 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने आश्वासन दिया कि पुनर्वास और पुनर्गठन कार्यक्रम के तहत शेष सभी लाभ उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने में मदद करने के लिए तुरंत दिए जाएंगे।

महानिदेशक ने तेलंगाना पुलिस की विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) के निरंतर और पेशेवर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि अकेले 2025 और 2026 के दौरान 19 वरिष्ठ समिति सदस्यों सहित 544 भूमिगत माओवादी कैडरों ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मूल निवासी केवल 11 भूमिगत माकपा कैडर शेष हैं, जिनमें से अधिकांश छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में सक्रिय हैं।

सरकार की अपील को दोहराते हुए डीजीपी ने शेष भूमिगत माओवादियों से हथियार डालने और अपने पैतृक गांवों में लौटने का आह्वान किया। उन्होंने हिंसा छोड़ने और गांव लौटने के आह्वान के साथ शांति एवं संवैधानिक रास्ता चुनने वालों को पूर्ण सुरक्षा, सहायता और पुनर्वास का आश्वासन दिया।

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