हैदराबाद , मार्च 30 -- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने तेलंगाना राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (एसपीएसई) में भारी वित्तीय संकट, शासन में कमियों और कामकाज में अनियमितताओं को उजागर किया है।
यह जानकारी मार्च 2023 को समाप्त अवधि के लिए तैयार अपनी नवीनतम अंकेक्षण रिपोर्ट में दी गई है, जिसे सोमवार को राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2023 तक तेलंगाना में कुल 83 एसपीएसई थे, जिनमें 77 सरकारी कंपनियाँ शामिल थीं। इनमें से 16 संस्थाएँ या तो बंद हो चुकी थीं या फिर परिसमापन की प्रक्रिया में थीं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 67 कार्यरत उद्यमों में से 49 (73 प्रतिशत) ने तीन या उससे अधिक वर्षों से अपने खातों को अंतिम रूप नहीं दिया था, जिससे पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक18 एसपीएसई की जांच की गयी जिनमें से छह ने 3,857.48 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा कमाया, जबकि 11 को 11,969.66 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि नौ उद्यमों की कुल सम्पत्ति तरह खत्म हो गई, और 17,921.33 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश के मुकाबले यह 50,930.63 करोड़ रुपये ऋणात्मक हो गई। अंकेक्षण में निगम से संबंधित शासन प्रणाली में कई कमियां भी सामने आईं, क्योंकि कई उद्यम स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने में नाकाम रहे, उन्होंने अंकेक्षण समितियां या नामांकन और पारिश्रमिक समितियां नहीं बनाईं, और उन्होंने प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों की नियुक्ति सुनिश्चित नहीं की। बोर्ड की बैठकें आयोजित करने में भी देरी देखी गई।
राज्य के स्वामित्व वाली सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल ) के विषय-विशिष्ट अनुपालन अंकेक्षण से ओवरबर्डन हटाने, कोयला परिवहन और स्टॉइंग अनुबंधों में अक्षमताएं सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि डीजल की खपत के अवास्तविक मानदंडों के कारण बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ, जबकि भारी अर्थ-मूविंग मशीनरी के लिए उच्च दरों और अनुबंधों में पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी के कारण 251.05 करोड़ रुपये का ऐसा खर्च हुआ जिसे टाला जा सकता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुबंध के प्रावधानों को लागू करने में विफलता के कारण 74.19 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऐसा खर्च हुआ जिसे टाला जा सकता था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कोयला लिंकेज की खराब योजना के कारण 25.59 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ, जबकि सतह परिवहन शुल्क को ठीक से तय न करने के कारण कोयला उपभोक्ताओं से 1,078.94 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई। अंकेक्षण में पर्यावरण संबंधी चिंताओं को भी उठाया गया, जिसमें यह बताया गया कि ठेकेदार ज़रूरत के हिसाब से अपशिष्ट उपचार संयंत्र लगाने में नाकाम रहे और भूमिगत भराई के कामों में ज़्यादा टिकाऊ विकल्पों के बजाय नदी की रेत का इस्तेमाल किया गया। कैग ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार घाटे में चल रहे उद्यमों के कामकाज की समीक्षा करे, खातों को समय पर अंतिम रूप देना सुनिश्चित करे, कॉर्पोरेट प्रशासन तंत्र को मज़बूत करे और एसपीएसई में परिचालन दक्षता में सुधार करे।
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