हैदराबाद , मार्च 23 -- तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने घोषणा की है कि सरकार मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना के संचालन के लिए एक कैबिनेट उप-समिति बनाने को तैयार है।
उन्होंने सोमवार को कहा कि सरकार विस्थापित होने वाले हर व्यक्ति का पुनर्वास सुनिश्चित करेगी और किसी को भी बेघर नहीं रहने देगी। विधान परिषद में मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति में उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क, आईटी और उद्योग मंत्री डी श्रीधर बाबू और परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर शामिल होंगे। यह समिति परियोजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी और सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करेगी। उन्होंने विपक्षी दलों से 'झूठे प्रचार' से बचने और रचनात्मक रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने मूसी परियोजना के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत शहर में यातायात को सुगम बनाने के लिए गंडीपेट से गौरेली तक नदी के किनारे एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना है।
बुनियादी ढांचे की पहलों पर उन्होंने घोषणा की कि बेगमपेट हवाई अड्डे पर भारत के पहले अंडरपास को मंजूरी मिल गयी है। इसका उद्देश्य सिग्नल पर लगने वाले जाम को कम करना और यातायात प्रवाह में सुधार करना है। केबीआर पार्क के पास मल्टी-लेवल पार्किंग का विकास और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने जैसे उपाय भी किये जा रहे हैं।
.शहरी परिवहन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद मेट्रो का विस्तार जल्द ही शुरू होगा। राज्य सरकार अंतिम छोर तक यातायात सुधारने के लिए लार्सन एंड टुब्रो से संचालन अपने हाथ में लेने पर विचार कर रही है। उन्होंने सिकंदराबाद और चेरलापल्ली रेलवे स्टेशनों के उन्नयन की भी योजना बतायी।
दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति पर श्री रेड्डी ने कहा कि 'तेलंगाना राइजिंग 2047' विजन के हिस्से के रूप में 10,000 वर्ग किमी का औद्योगिक गलियारा विकसित किया जायेगा। साथ ही,' प्योर, क्योर और रेयर जोन ' का विकास भी किया जायेगा।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदूषण रोकने और आवास के लिए जमीन खाली करने के उद्देश्य से शहर के भीतर प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को आउटर रिंग रोड के बाहर स्थानांतरित किया जायेगा।
अनियंत्रित शहरीकरण के प्रति आगाह करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद को दिल्ली जैसे शहरों में दिखने वाले प्रदूषण और नागरिक चुनौतियों से बचना चाहिए। उन्होंने सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए 'हिल्ट' नीति शुरू करने और औद्योगिक भूमि को बहु-उपयोगी क्षेत्रों में फिर से वर्गीकृत करने की घोषणा की।
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