बहराइच , जनवरी 22 -- त्तर प्रदेश के जनपद बहराइच में कतर्नियावन्य जीव प्रभाग के निशानगाड़ा रेंज स्थित करिकोट ग्राम पंचायत के लोहरा गांव में गुरुवार को तेंदुए के लगातार हमलों से प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए एक नई और अनूठी पहल की गई है। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) द्वारा यहां 'वन्य शिकारी जीव रोधी आवासीय समूह' (पीपीएच क्लस्टर) का निर्माण कर गुरुवार को इसका उद्घाटन किया गया।

डब्ल्यूटीआई ने तेंदुए की लगातार आवाजाही और हमलों से प्रभावित छह घरों-रामदेव, कनछेद, जोगेंद्र सिंह, राकेश, चूड़ा और पप्पू-को एक साथ सुरक्षित आवासीय समूह में शामिल किया है। बीते कई महीनों से इन घरों के आसपास तेंदुए की सक्रियता देखी जा रही थी, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल था और कई मवेशी भी इसका शिकार बने थे।

इस आवासीय समूह को बांस-बल्लियों और प्लास्टिक जालियों की सहायता से तैयार किया गया है। जालियों की ऊंचाई लगभग 15 से 18 फीट रखी गई है, जिसमें लोगों के आवागमन के लिए दरवाजे लगाए गए हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रकाश व्यवस्था की गई है, ऊपरी हिस्से में कंटीले तार लगाए गए हैं तथा जानवरों की मौजूदगी पर लोगों को सतर्क करने के लिए सायरन की व्यवस्था भी की गई है।

इस अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्कूल के छात्र-छात्राओं और स्थानीय ग्रामीणों को आमंत्रित कर वन्य जीवों से सुरक्षा के उपायों के प्रति जागरूक किया गया।

डब्ल्यूटीआई के मानव-वन्यजीव संघर्ष डिवीजन के प्रमुख डॉ. अभिषेक घोसाल ने बताया कि यह एक प्रायोगिक परियोजना है। कतर्नियाघाट के जंगल से सटे कई आबादी वाले क्षेत्रों में तेंदुओं की आवाजाही बनी रहती है। लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी ऐसे पीपीएच क्लस्टर अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में बनाए जाएंगे।

कार्यक्रम में डब्ल्यूटीआई की फील्ड सहायक ज्योति अटिल, वन दरोगा पीडी कनोइजिया, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि केशवराम चौहान सहित वन विभाग और स्थानीय समुदाय के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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