कोलकाता , जनवरी 21 -- पश्चिम बंगाल सरकार के साथ प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की खींचतान के बीच ईडी निदेशक राहुल नवीन राज्य का दौरा करने वाले हैं।
ईडी सूत्रों के अनुसार, श्री नवीन गुरुवार को तीन दिवसीय दौरे पर कोलकाता पहुंचेंगे और शुक्रवार को सॉल्ट लेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में वरिष्ठ ईडी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे तथा शनिवार को दिल्ली लौट जाएंगे। उनके दौरे का वास्तविक उद्देश्य हालांकि आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है।
श्री नवीन का पश्चिम बंगाल का यह दूसरा दौरा होगा। इससे पहले वह 09 जनवरी, 2024 को राज्य के दौरे पर आये थे , जब ईडी अधिकारियों पर तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित नेता शाहजहां शेख के संदेशखाली स्थित घर पर छापे के दौरान हमला हुआ था।
सूत्रों के मुताबिक ईडी अधिकारियों को तीनों दिन सीजीओ कॉम्प्लेक्स में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है, और बैठक के दौरान आई-पीएसी मामले पर चर्चा होने की संभावना है।
इस दौरे को केंद्रीय एजेंसी और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के बीच हालिया टकराव की पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है। यह टकराव राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पीएसी के कोलकाता ऑफिस और इसके संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर ईडी की तलाशी के बाद हुआ था।
ईडी ने 8 जनवरी को आई-पीएसी के कार्यालय और श्री जैन के घर पर छापे मारे थे। तलाशी के दौरान, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के साथ दोनों जगहों पर पहुंचीं।
आई-पीएसी फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव से जुड़ा काम संभाल रही है।
सत्तारूढ़ दल ने आरोप लगाया कि ईडी ने भाजपा के इशारे पर काम करते हुए दल के उम्मीदवारों की सूची तक पहुंचने का प्रयास किया और आई-पीएसी के कार्यालय में रखे संवेदनशील राजनीतिक डाटा को ज़ब्त करने की कोशिश की।
बाद में सुश्री बनर्जी को कागजात और फाइलों के साथ परिसर से बाहर निकलते देखा गया। उन्होंने दावा किया कि वह वहां राज्य की प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के तौर पर गई थीं।
ईडी ने उनके दखल के बाद आपत्ति जताई और मामला जल्द ही न्यायालय पहुंच गया। कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद अब मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है।
ईडी ने घटना के दौरान मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
यह कानूनी लड़ाई तब से और बढ़ गई है, जिसमें ईडी और राज्य की जांच एजेंसियां कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई में उलझी हुई हैं।
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