कोलकाता , नवंबर 01 -- पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के समक्ष विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी के खिलाफ मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को धमकाने का आरोप लगाते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

तृणमूल कांग्रेस ने यह शिकायत श्री अधिकारी के हाल ही में मीडिया को दिए गए उस बयान के बाद की गई है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था , "बिहार में 52 बीएलओ अभी भी जेल में हैं। आप लोग भी सलाखों के पीछे पहुँचेंगे। हम यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे।"तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अरूप बिस्वास ने सीईओ को लिखे पत्र में कहा कि श्री अधिकारी की टिप्पणी चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों वाले सरकारी अधिकारियों को धमकाने के समान है। श्री बिस्वास ने लिखा, "मतदाता सूची की अखंडता की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी जिन लोगों पर है, उन्हें जानबूझकर धमकाया जा रहा है।" उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयाँ राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को कमज़ोर कर सकती हैं।

श्री बिस्वास ने श्री अधिकारी की टिप्पणियों का वीडियो क्लिप संलग्न किया और उन्हें भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 के तहत एक "दंडनीय अपराध" बताया। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह श्री अधिकारी के ख़िलाफ़ तुरंत पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दे, यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षात्मक दिशानिर्देश जारी करे कि बीएलओ और अन्य चुनाव अधिकारी बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपना कर्तव्य निभा सकें और एक सार्वजनिक अधिसूचना जारी करके राजनीतिक दलों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को धमकाने के ख़िलाफ़ चेतावनी दे।

उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकियाँ अस्वीकार्य हैं, खासकर जब 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले चार नवंबर से पूरे राज्य में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने वाली है और बीएलओ विशिष्ट फ़ॉर्म लेकर घर-घर जाएँगे, मतदाताओं का विवरण और दस्तावेज़ एकत्र करेंगे और उन्हें एक निर्दिष्ट ऐप के माध्यम से अपलोड करेंगे।

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