हैदराबाद , दिसंबर 06 -- हार्टफुलनेस के वैश्विक मुख्यालय कान्हा शांति वनम में शनिवार को वार्षिक गीतोपदेश सम्मेलन का तीसरा संस्करण आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में तेलंगाना के राज्यपाल श्री जिश्नु देव वर्मा और हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक तथा श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष पूज्य दाजी जी की उपस्थिति रही। तेलंगाना के 2,500 से अधिक छात्रों के साथ-साथ भारत भर की 30 से ज्यादा स्कूलों के प्रतिभागी शामिल हुए।
सम्मेलन में श्लोक पाठ, कथा-वाचन, पोस्टर निर्माण, प्रख्यात वक्ताओं के प्रवचन, पैनल चर्चाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। इस वर्ष की थीम थी- "अपने हृदय में दिव्यता को देखो"-जो आंतरिक चिंतन और आध्यात्मिक जागरूकता को प्रेरित करने पर केंद्रित थी।
गीतोपदेश सम्मेलन छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी आयु वर्ग के लोगों का स्वागत करता है और भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान को सरल तरीके से प्रस्तुत कर आंतरिक शांति, संयम और नैतिक जीवन को बढ़ावा देता है।
इस अवसर पर तेलंगाना के राज्यपाल श्री जिश्नु देव वर्मा ने कहा, "भगवद्गीता मानवता के लिए शाश्वत मार्गदर्शक है। यह सिखाती है कि कर्तव्य इच्छा से ऊपर है, स्थिर मन से सही-गलत का निर्णय होता है। दाजी जी के मार्गदर्शन में हार्टफुलनेस इस सत्य को बच्चों, युवाओं और बड़ों तक सबसे सरल तरीके से पहुंचा रहा है।"पूज्य दाजी जी ने गीता के शिक्षाओं को जीवन में उतारने पर जोर देते हुए कहा, "गीता का महत्व केवल श्लोकों के पाठ में नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में अपनाने में है। गीता हमें संयम, सरलता, कर्तव्य और स्वयं एवं विश्व के साथ सामंजस्य का मार्ग दिखाती है। इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में सफलता मिलती है।"सम्मेलन में विश्व स्तर पर आयोजित ग्लोबल श्लोक प्रतियोगिता के समापन का भी गवाह बना, जिसमें दुनिया भर की 150 स्कूलों के 5,000 से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया था। फाइनलिस्ट बच्चों को कान्हा शांति वनम में सम्मानित किया गया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित