वाशिंगटन , जनवरी 29 -- वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और पश्चिमी देशों में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने की बड़ी रणनीति के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को सीनेट विदेशी संबंध समिति के सामने करीब तीन घंटे तक गवाही दी और ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति का बचाव किया।

श्री रूबियो ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के बाद देश की अंतरिम सरकार के साथ काम करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका "बहुत जल्द" दक्षिण अमेरिकी देश में अपनी राजनयिक मौजूदगी स्थापित करेगा जो लोकतांत्रिक शासन बहाल करने के उद्देश्य से एक चरणबद्ध रणनीति अपनाएगा, साथ ही अंतरिम अधिकारियों पर कड़ी नज़र रखेगा।

श्री रूबियो ने सांसदों से कहा, "ये मुश्किल चीज़ें हैं। यह कोई रात्रिभोज नहीं है, जिसे आप फ्रिज से निकालकर माइक्रोवेव में रखें और ढाई मिनट में वह खाने के लिय तैयार हो जाये।"उन्होंने वेनेजुएला में अमेरिका के अभियान को संसद की पहले से मंज़ूरी या कैपिटल हिल को पहले से जानकारी दिए बिना आगे बढ़ाने के प्रशासन के फैसले के लिए अपने समर्थन को भी दोहराया।

श्री रूबियो ने सीनेट की सुनवाई में सांसदों से कहा कि ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ "सम्मानजनक बातचीत का रास्ता" बनाया है, हालांकि अभी बहुत काम करना बाकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बातों पर नहीं, काम के आधार पर फैसला करेगा।

ईरान के मामले पर श्री रूबियो ने सावधानी भरा रुख अपनाया और देश के नेतृत्व के संभावित पतन को लेकर अनिश्चितता को स्वीकार किया। श्री रूबियो ने कहा कि किसी को नहीं पता है कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता को सत्ता से हटा दिया गया तो कौन सत्ता संभालेगा।

उन्होंने माना कि यह स्थिति वेनेजुएला में मादुरो को हटाए जाने से ज़्यादा जटिल होगी। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि कोई आपको इस बात का आसान जवाब दे सकता हूं कि अगर सर्वोच्च नेता का शासन गिर जाता है तो ईरान में आगे क्या होगा।" उन्होंने कहा कि हालांकि अमेरिका अमेरिकी सेनाओं और सहयोगियों की रक्षा के लिए पहले से कार्रवाई कर सकता है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि तनाव बढ़ने से बचा जा सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्र डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को धमकी देते रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाता है तो अमेरिकी नौसेना का "बेड़ा" पश्चिमी एशिया की ओर बढ़ रहा है। श्री ट्रंप की धमकियों का जवाब देते हुए, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने चेतावनी दी थी कि देश की सेना ईरान की ज़मीन, हवाई क्षेत्र या पानी के खिलाफ किसी भी हमले का "तुरंत और ज़ोरदार" जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। श्री अराक़ची ने एक्स पर लिखा, "हमारी बहादुर सेना, ट्रिगर पर उंगली रखे हुए, हमारी प्यारी ज़मीन, हवा और समुद्र के खिलाफ किसी भी हमले का तुरंत और ज़ोरदार जवाब देने के लिए तैयार है।"ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये टिप्पणियां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के जवाब में थीं। उन्होंने जून में इज़रायल के साथ 12 दिन की लड़ाई से मिले "कीमती सबक" की ओर भी इशारा किया, और दावा किया कि इन अनुभवों ने भविष्य में किसी भी खतरे का और भी मज़बूती से, तेज़ी से और गहराई से जवाब देने की ईरान की क्षमता को मज़बूत किया है।

यूरोप की बात करते हुए, श्री रूबियो ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत एक बड़ी रुकावट पर आकर रुक गयी है, जो है डोनेट्स्क इलाके पर रूस का दावा। उन्होंने बातचीत को "लचीली और तेज़" बताते हुए कहा कि अमेरिका की तरफ से दी गयी सुरक्षा गारंटी पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गयी है, लेकिन यह तभी लागू होगी जब युद्ध खत्म होगा।

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