नयी दिल्ली , दिसंबर 05 -- द्रमुक के टी आर बालू ने तमिलनाडु में मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम सुब्रमण्यमस्वामी मंदिर में कुछ लोगों के उपद्रव करने का मामला शुक्रवार को लोकसभा में उठाया और मंदिर में पहले से चली आ रही व्यवस्था ही बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए एक न्यायाधीश के संबंध में टिप्पणी की जिस पर सत्ता पक्ष सदस्यों ने कड़ा एतराज जताया।
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मांग की तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले संसदीय कार्य राज्य मंत्री डाॅ एल मुरुगन को भी इस मामले में अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए। श्री मुरुगन जब अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो द्रमुक सदस्यों ने शोरशराबा शुरू कर दिया। द्रमुक के कुछ सदस्य सदन के बीचोंबीच आ गये और कुछ सदस्य श्री मुरुगन की सीट के नजदीक आ गये। शोरशराबे के बीच श्री मुरुगन ने अपनी बात रखी।
श्री मुरुगन का वक्तव्य समाप्त होने के बाद श्री बालू को पुन: अपनी बात रखने का मौका दिये जाने के पीठासीन कृष्ण प्रसाद तेन्नटी के आश्वासन पर द्रमुक सदस्य अपने-अपने स्थानों पर चले गये।
श्री बालू ने इसके बाद कहा कि संबंधित न्यायाधीश ने खुद ही कहा है कि वह एक संगठन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने मांग की कि तिरुप्परनकुद्रम सुब्रमण्यमस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना और अन्य कार्य पहले की तरह चलने चाहिए।
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