अमरोहा , नवंबर 05 -- उत्तरी भारत के ऐतिहासिक महाभारत कालीन गढ़गंगा-तिगरी मेले में कार्तिक पूर्णिमा और प्रकाश पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। तिगरी घाटों की सफाई व अन्नदाता लंगर में खिचड़ी प्रसाद वितरण किया गया। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में बह रही गंगा नदी के दोनों ओर कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक देव के 556 वें प्रकाश पर्व पर उत्तरी भारत के दिल्ली, राजस्थान, गुरुग्राम, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई।

पांचाल देश का हिस्सा रहे गढ़गंगा-तिगरी मेले को लेकर पौराणिक आख्यान तथा किंवदंतियां प्रचलित हैं। भारतीय धर्म तथा संस्कृति में असुरासुर संग्राम सर्वविदित है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को भगवान शिव ने त्रिपासुर का वध करके उसके आलोक से देवताओं तथा मानव को भयमुक्त किया । मानवता के कल्याण के लिये किरत करो , नाम जपो, वंड छको का शाश्वत संदेश देने वाले श्री गुरु नानक देव जी के 556 वें प्रकाश पर्व पर ग्रामीण भारत के लाखों श्रद्धालुओं द्वारा गढ़गंगा- तिगरी मेले में में भजन कीर्तन, अन्नदाता लंगर में खिचड़ी प्रसाद वितरण, पूजा अर्चना, दान स्नान मध्यरात्रि से शुरू हो गया था, जो आज शाम तक जारी रहा। प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला यह पर्व प्रत्यक्ष दर्शनीय है।

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