बैतूल , अप्रैल 14 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के सारनी-पाथाखेड़ा कोल बेल्ट स्थित तवा-3 खदान में कोयले की खोज को बड़ा झटका लगा है। यहां 148 मीटर तक ड्रिलिंग के बावजूद कोयले का कोई संकेत नहीं मिला है और लगातार पानी निकलने से परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार कोयले के नए भंडार की तलाश के लिए खदान में ड्रिलिंग कार्य कराया जा रहा है। जून 2024 में नागपुर की सिम एंड सन्स कंपनी को इसका ठेका दिया गया था। करीब डेढ़ वर्ष की ड्रिलिंग के बाद भी अब तक 148 मीटर गहराई तक केवल पानी ही मिला है, जिससे कार्य की गति प्रभावित होने के साथ परियोजना लागत बढ़ने की आशंका है।

इस क्षेत्र में पहले तवा-1 और तवा-2 खदानों में 60 मीटर की गहराई पर ही कोयला मिल जाता था और 100 से 200 मीटर के बीच पर्याप्त भंडार पाए गए थे। इसी आधार पर तवा-3 में भी उम्मीद जताई गई थी, लेकिन अब तक की ड्रिलिंग में मुरुम, मिट्टी और पानी ही मिला है।

स्थल निरीक्षण के दौरान ड्रिलिंग से बने गड्ढों में पानी भरा पाया गया। एक गड्ढे में सीमेंट का ढलानदार मार्ग भी बनाया गया है, लेकिन वहां भी कोयले के संकेत नहीं मिले। इससे परियोजना के साइट चयन और सर्वे प्रक्रिया पर प्रश्न उठ रहे हैं। प्रारंभ में 33 करोड़ रुपए की लागत से शुरू यह प्रोजेक्ट अब बढ़कर करीब 200 करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है।

परियोजना की समयसीमा भी प्रभावित होती नजर आ रही है। 148 मीटर ड्रिलिंग में ही डेढ़ वर्ष का समय लग चुका है, जबकि लक्ष्य 650 मीटर तक खुदाई का है। ऐसे में अगस्त 2027 तक कार्य पूर्ण होना कठिन दिख रहा है, जिसका असर भविष्य में बिजली उत्पादन और कोयला आपूर्ति पर पड़ सकता है।

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