नयी दिल्ली , दिसंबर 4 -- तंबाकू तथा तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने संबंधी केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 को गुरुवार को संसद की मंजूरी मिल गयी।
विधेयक पर करीब साढ़े तीन घंटे की चर्चा और उस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब के बाद राज्यसभा ने बिना किसी संशोधन के इसे लोकसभा को लौटने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। इसे बुधवार को लोकसभा की मंजूरी मिल गयी थी।
वित्त मंत्री के जवाब के दौरान विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने उस समय जोरदार हंगामा शुरू कर दिया जबकि वह पश्चिम बंगाल को मनरेगा योजना का पैसा जारी न करने के उनके आरोपों का जवाब दे रही थीं।
चर्चा के दौरान विपक्ष ने इसे जहां राजस्व वसूली का प्रयास बताते हुए विधेयक की आलोचना की, वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसे जन स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि दुनिया में 80 देश सिगरेट की कीमतों को निरंतर बढ़ाते रहते हैं ताकि इसके उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके। भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के सिगरेट महंगाई सूचकांक के मानकों के अनुसार इस पर कर एवं शुल्क की दरों में संशोधन करता है।
इस विधेयक का उद्देश्य केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 में संशोधन करना है।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद उसके तहत तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर 28 प्रतिशत की दर से राजस्व क्षतिपूति उपकर लगाया गया था और उसके कारण इन पर उत्पाद शुल्क काफी कम कर दिया गया था।
जीएसटी परिषद की सितंबर में 56वीं बैठक में इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में व्यापक सुधार करने के साथ साथ विलासिता की वस्तुओं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर लगाने वाले 28 प्रतिशत के उपकर के प्रावधान को समाप्त करने का निर्णय किया किया गया। ऐसे में केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन के जरिये इन पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है ताकि ये सस्ते न हो जाएं।
वित्त मंत्री सीतारमण ने विधेयक पर चर्चा के जवाब में कहा कहा कि दुनिया के 80 देशों में सिगरेट पर कर की दरें जन स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को देखते हुए निरंतर बढ़ायी जाती है ताकि सिगरेट सस्ता न हो। भारत भी इसके मूल्य निर्धारण में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के अनुसार बढ़ाया जाता है ताकि सिगरेट खरीदना सस्ता न पड़े।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बीड़ी मजदूरों के हित को देखते हुए इस पर कर भार में वृद्धि नहीं की है। उन्होंने बीड़ी पर जीएसटी को घटा कर 18 प्रतिशत किये जाने के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि जीएसटी परिषद की 56 बैठक के फैसले के अनुसार 28 प्रतिशत क्षतिपूर्ति उपकर की दर समाप्त करने के बाद इसे 18 प्रतिशत की दर के दायरे में रखा गया है क्यों कि इसे 40 प्रतिशत की दर में नहीं रखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लाटरी पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से बढ़ा कर 40 प्रतिशत इस लिए किया गया है क्यों कि लाटरी को 18 प्रतिशत की दर में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने बीड़ी श्रमिकों के कल्याण की योजनाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि दस राज्यों में तम्बाकू किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि आंध प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक में बड़ी संख्या में किसाना तम्बाकू की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती करने लगे हैं।
विधेयक में प्रावधान है कि बीड़ी-सिगरेट और हुक्का-चीरुट में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू पर उत्पाद शुल्क 64 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत किया जायेगा। वहीं, तंबाकू के अपशिष्ट पर शुल्क 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जायेगा।
सिगार, चीरुट और सिगरिलोज पर उत्पाद शुल्क 12.5 फीसदी या प्रति हजार 4,006 रुपये से बढ़ाकर 25 फीसदी या प्रति हजार 5,000 रुपये किया जायेगा।
बिना फिलटर वाले 65 एमएम तक के सिगरेट पर शुल्क 200 रुपये प्रति हजार से बढ़ाकर 2,700 रुपये प्रति हजार और 65 से 70 एमएम तक पर 250 रुपये प्रति हजार से बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति हजार किया जायेगा। फिलटर वाले सिगरेट पर अभी लंबाई के हिसाब से 440 रुपये प्रति हजार से 735 रुपये प्रति हजार तक उत्पाद शुल्क का प्रावधान है। इसे बढ़ाकर तीन हजार रुपये से 11 हजार रुपये प्रति हजार स्टिक तक करने का प्रस्ताव है।
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