नयीदिल्ली , दिसम्बर 03 -- लोकसभा में तम्बाकू उत्पादन पर भारी कर लगाने तथा इससे किसानों को होने वाले नुकसान को लेकर सदस्यों ने चिंता जताई और कहा कि सरकार को तम्बाकू उत्पादक किसानों को वैकल्पित खेती के लिए प्रेरित कर लोगों को तम्बाकू का सेवन नहीं करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
भाजपा की डॉ डी पुरंधेश्वरी ने लोकसभा में केंद्रीय उत्पाद शुल्क(संशोधन) विधेयक 2025 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि तम्बाकू का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए उत्पादक प्रचार के नये नये तरीके अपनाते हैं जबकि यह कैंसर का सबसे बड़ा खतरा पैदा करता है। इसके इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है। दुनिया में भारत में तम्बाकू का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होता है और स्वास्थ्य के लिए यह अत्यंत खतरनाक है। सबसे चिंता की बात यह है कि दुनिया में 20 प्रतिशत बीमारियां तम्बाकू तथा इस तरह के उत्पादों के सेवन से होती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत एक कल्याणकारी राज्य है और तम्बाकू के इस्तेमाल के लिए लोगों को हताेत्साहित करने की दिशा में काम होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चिंता का विषय यह है कि आज देश के 60 लाख किसान और दो करोड़ लोगों के लिए यह रोजगार का साधन बना हुआ है और सरकार को इस स्थिति को देखते हुए किसानों की समस्या पर भी ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि लाखों हेक्टर जमीन पर तम्बाकू की खेती को सरकार के प्रयास से दूसरी फसलों के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है लेकिन अभी सरकार को तम्बाकू उत्पाद से जुड़े 60 लाख किसानों के बारे में सोचना चाहिए।
कांग्रेस के कार्ति पी चिदम्बरम ने कहा कि तम्बाकू के कारण दो लाख करोड़ रुपए का सालाना नुकसान होता है। सरकारों के लिए यह राजस्व का बड़ा आधार है लेकिन इसकी कीमत बढ़ाने से समस्या का समस्या नहीं होगा। कीमत बढ़ने से राजस्व तो बढ जाता है लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता है। उनका कहना था कि सरकार को तम्बाकू उत्पाद किसानों को दूसरे उत्पादों की तरफ ले जाने के लिए काम करना चाहिए। तम्बाकू का इस्तेमाल घटाने का प्रयास होना चाहिए लेकिन यदि इसकी कीमत बढती है तो इससे ब्लैकमेलिंग बढ सकती है इसलिए सरकार को तम्बाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए इस दिशा में प्रयास आवश्यक है।
समाजवादी पार्टी के नरेश चंद्र उत्तम पटेल ने कहा कि सरकार तम्बाकू पर ज्यादा टैक्स लगाकर हजारों किसानों की रोजीरोटी पर हमला कर रही है। उनका कहना था कि यदि टैक्स बढता है तो इससे बड़े उद्योगों को तो राहत मिलेगी लेकिन छोटे किसान और उद्यमियों को भारी नुकसान होगा इसलिए जल्दबाजी में इस विघेयक को स्थायी समिति को सौंपना चाहिए। इसमें उन लोगों के लिए राहत की व्यवस्था की जानी चाहिए जो तम्बाकू की खेती करते हैं। मध्य प्रदेश में बीड़ी के पत्तों का कारोबार गरीब करते हैं औरउनके हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के प्रोफेसर सौगत राय ने कहा कि तम्बाकू को सरकार ने सबसे ज्यादा कर की श्रेणी में है। तम्बाकू और पान मसाला के कर को यथावत उच्च श्रेणी में ज्यादा राजस्व अर्जन के मकसद से रखा गया है। इस विधेयक से तम्बाकू, सिगरेट, जर्दा आदि पर उच्च स्तरीय सेस जारी रहेगा इसका मकसद इसे लग्जरी श्रेणी में रखकर इन उत्पादों से ज्यादा राजस्व अर्जित करना है। उनका कहना था कि तम्बाकू कैंसर का बड़ा कारण है, सवाल है कि सरकार की स्वास्थ्य के लिए खतरनाक इन उत्पादों के प्रति लोगों का उत्साह कम करने की क्या योजना है इस बारे में विधेयक में कुछ नहीं कहा गया है। भले ही सरकार को राजस्व का नुकसान हो इस बारे में कड़े कदम उठाने की जरूरत है। तम्बाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए जो नैतिक सवाल उठाए जा रहे हैं इनका जवाब वित्तमंत्री को देना चाहिए कि तम्बाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए क्या कदम उठा रही हैं।
द्रमुक के डॉ कलानिधि वीरास्वामी ने कहा कि तम्बाकू से फेफड़े की समस्या भी पैदा होती है। कीमत बढ़ाने से तम्बाकू का इस्तेमाल कम होने वाला नहीं है। उन्होंने इलाज के लिए उनके पास आए कई मरीजों का उदाहरण दिया और कहा कि लोग आसानी से इस लत को छोड़ने वाले नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थल पर सिगरेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने के फायदे हुए हैं और जो तम्बाकू का इस्तेमाल नहीं करते हैं उनको इससे ज्यादा फायदा पहुंचा है। सिर्फ भारत में ही नहीं विदेशों में भी इस तरह की व्यवस्था कई देशों में अपनाई गयी है और सरकार को नैतिक आधार पर लोगों को तम्बाकू का इस्तेमाल कम करने क लिए प्रोत्साहित करने के नैतिक कदम उठाने चाहिए।
तेलुगु देशम पार्टी के लवू श्री कृष्ण देवरायलु ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि तम्बाकू का इस्तेमाल लोग नहीं करें इसके लिए प्रोत्साहित करने वाले कदम उठाए जाने चाहिए। अपने संसदीय क्षेत्र में बड़े स्तर पर तम्बाकू का उत्पादन किए जाने का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि ठेकेदार किसानों के पास आते हैं और किसानों से कहते हैं कि वे जितना भी उत्पादन करेंगे उसको खरीदा जाएगा। उनका यह भी कहना था कि राज्य सरकारें भी तम्बाकू खरीद रही हैं तो कैसे तम्बाकू के इस्तेमाल को रोका जा सकता है इस बारे में गहनता से विचार किया जाना आवश्यक है।
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