चेन्नई , मई 01 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के उस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास ऐसा सरकारी आदेश जारी करने का कोई उचित कारण नहीं है जिसके तहत तीसरी प्रेग्नेंसी के लिए मातृत्व अवकाश को सिर्फ 12 सप्ताह तक सीमित कर दिया जाए।
न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार और एन. सेंथिलकुमार की द्वितीय पीठ ने कहा कि सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत मिली कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए गत 13 मार्च को इस संबंध में सरकारी आदेश जारी कर इस तरह की पाबंदी लगाई थी, जो उच्चतम न्यायालय तथा इस अदालत की ओर से तय किए गए सिद्धांतों के खिलाफ थी और इसे यह अदालत मंजूरी नहीं दे सकती।
पीठ ने विल्लुपुरम जिला अदालत की एक कर्मचारी शायी निशा की याचिका पर यह आदेश दिया। शायी निशा ने गत दो 2026 से एक फरवरी, 2027 तक मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था। प्रधान जिला न्यायाधीश ने 27 मार्च को सरकार के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए मातृत्व अवकाश को सिर्फ तीन महीने तक सीमित कर दिया था।
अदालत ने कहा कि चाहे पहली, दूसरी या तीसरी प्रेग्नेंसी हो, तकलीफें एक जैसी ही होती हैं और माताओं को प्रेग्नेंसी से पहले और बाद दोनों समय देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए मातृत्व से जुड़े फायदे-खासकर तीसरी प्रेग्नेंसी के लिए मातृत्व अवकाश मंजूर करने में सरकार किसी भी तरह का भेदभाव नहीं कर सकती।
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