चेन्नई , नवंबर 11 -- तमिलनाडु में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और उसके सहयोगियों ने मंगलवार को राज्य में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर की निंदा करते हुए चुनाव आयोग से इसे रद्द करने और आसन्न विधानसभा चुनावों के बाद इसे करने की मांग की है।

सांसदों, विधायकों और जिला पदाधिकारियों सहित द्रमुक के शीर्ष नेता इस प्रदर्शन में मौजूद थे। इसके अतिरिक्त तमिलनाडु कांग्रेस समिति के अध्यक्ष के सेल्वापेरुंथगई, मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) महासचिव वाइको, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) नेता और लोकसभा सांसद थोल थिरुमावलवन, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव एम षणमुगम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव आर मुथरासन सहित द्रमुक के सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने इस प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और चुनाव आयोग की निंदा करते हुए नारे लगाए। उनका कहना था कि चुनाव नजदीक होने के बावजूद एसआईआर प्रक्रिया जल्दबाजी में की गई है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चुनाव आयोग शुरू से ही विपक्षी दलों की मांग पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है और एसआईआर की प्रक्रिया ऐसे समय में शुरू कर रहा है जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने बचे हैं।

द्रमुक के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के सदस्यों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों और भाजपा विरोधी मतदाताओं को लक्षित तरीके से मताधिकार से वंचित करने के मकसद से और केंद्र सरकार के सक्रिय समर्थन से इस इसे अंजाम दिया जा रहा है।

बयान में कहा गया है, "बिहार में एसआईआर में हुई गंभीर गलतियों को दूर किए बिना 12 राज्यों में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना लोकतंत्र को दफनाने का एक प्रयास है। चुनाव आयोग जिस जल्दबाजी में यह काम कर रहा है, उससे संदेह पैदा होता है।"इसमें बताया गया है कि उत्तर-पूर्वी मानसून के सक्रिय होने के कारण, कृषि और संबद्ध गतिविधियों में लगे अधिकांश लोगों को गणना प्रपत्र भरने और जमा करने के लिए आवश्यक समय नहीं मिलेगा जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नाम हटाए जाएँगे।

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