चेन्नई , जनवरी 10 -- तमिलनाडु सरकार ने 2021 और 2025 के बीच राज्य भर में 100 नए आरक्षित वनों को अधिसूचित किया है, जो वन संरक्षण को मजबूत करने और पारिस्थितिक सुरक्षा बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत की राष्ट्रीय वन नीति (1988) भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 33 हिस्से में वनों के विस्तार का लक्ष्य निर्धारित करता है।
तमिलनाडु ने इस राष्ट्रीय उद्देश्य की ओर लगातार प्रगति की है और वर्तमान में यहाँ 24.47 प्रतिशत वन और वृक्ष क्षेत्र हैं।
इस संदर्भ में, 100 वनों को आरक्षित वनों के रूप में अधिसूचित करना राज्य द्वारा संरक्षण की एक अभूतपूर्व और दूरदर्शी पहल है। इन वनों को तमिलनाडु वन अधिनियम, 1882 की धारा 16 के तहत अधिसूचित किया गया है।
ये अधिसूचित आरक्षित वन डिंडीगुल, धर्मपुरी, मदुरै, कल्लाकुरिची, थेनी, शिवगंगा, नमक्कल, नीलगिरी, सलेम और तेनकासी जिलों में फैले हुए हैं, जो 13,494.95 हेक्टेयर (लगभग 135 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में फैले हुए हैं।
इन नए अधिसूचित वनों में, थेनी जिले का 'हाईवेविस वन क्षेत्र सबसे बड़ा है, जिसका विस्तार 2,836.33 हेक्टेयर है।
इस अवसर पर, वन और खादी मंत्री आर. एस. राजाकन्नप्पन ने 100 नए आरक्षित वनों की अधिसूचना के दस्तावेजीकरण वाली एक स्मारक पुस्तिका जारी की।
पुस्तिका का विमोचन शुक्रवार की शाम यहाँ पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू की उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख श्रीनिवास आर रेड्डी; मुख्य वन्यजीव वार्डन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश कुमार डोगरा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं सरकार के विशेष सचिव (पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन) अनुराग एस मिश्रा उपस्थित थे।
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