चेन्नई , मार्च 17 -- तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान की तैयारियों के बीच उड़न दस्तों और निगरानी टीमों ने राज्य भर में अब तक 28.23 करोड़ रुपये की नकदी और सामान जब्त किया है। तमिलनाडु की मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
चुनाव आयोग (ईसीआई) ने तमिलनाडु चुनावों के लिए सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षक टीमों सहित कुल 321 पर्यवेक्षकों की टीमें गठित की हैं।
श्रीमती अर्चना पटनायक ने यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में तमिलनाडु में लागू चुनाव व्यय निगरानी और प्रवर्तन उपायों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सूक्ष्म निगरानी और हिसाब-किताब रखने का मुख्य उद्देश्य सभी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित करना है, चाहे वे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करते हों या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हों।
निर्धारित मानदंडों के अनुसार, विधानसभा चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार अधिकतम 40 लाख रुपये तक का चुनाव संबंधी खर्च कर सकता है। इस तरह के खर्च की प्रभावी ढंग से निगरानी के लिए, संबंधित जिला चुनाव अधिकारियों की देखरेख में जिला स्तर पर एक मजबूत बहु-स्तरीय चुनाव व्यय निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है।
उन्होंने कहा कि कड़ाई से प्रवर्तन सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों को उड़न दस्तों और नाका दल सहित विशेष प्रवर्तन दल से लैस किया गया है। आयकर विभाग, सीमा शुल्क विभाग और अन्य जैसी कुल 25 चुनाव व्यय निगरानी एजेंसियां भी निगरानी और सतर्कता में लगी हुई हैं।
मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक ने बताया कि वर्तमान में राज्य में सभी निर्वाचन क्षेत्रों में 2,160 उड़न दस्ते और 2,160 नाका दल यानी प्रत्येक चुनाव क्षेत्र में नौ उड़न दस्ते और नौ नाका दल गहन निगरानी अभियानों में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।
आज तक, 23.28 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी और सामान जब्त किया गया है, जिसकी जांच चल रही है।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सभी जिलों में जिला चुनाव नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं। जनता से प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। जिला चुनाव अधिकारी सभी हितधारकों के आदर्श आचार संहिता के पालन की भी बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।
अब तक सार्वजनिक संपत्तियों से कुल 1.68 लाख अवैध प्रचार सामग्री हटायी गयी हैं और 61 प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आचार संहिता के प्रावधानों के तहत दिवंगत नेताओं की मूर्तियों को ढंकने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि सार्वजनिक स्थानों या सरकारी भवनों में प्रदर्शित सक्रिय राजनेताओं की तस्वीरों को आचार संहिता लागू होते ही तुरंत ढंकना अनिवार्य है।
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