रायगढ़ , जनवरी 07 -- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में हाल ही में घटित घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। इस मामले के मुख्य आरोपी चित्रसेन साहू को रायगढ़ में पुलिस अधिकारियों द्वारा अर्धनग्न अवस्था में चूड़ी, बिंदी, लिपस्टिक और काजल लगाकर शहर में घुमाए जाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

आरोपी के परिजनों ने इस कार्रवाई को अमानवीय और कानून के विरुद्ध बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

परिजनों का कहना है कि किसी भी आरोपी को दंड देने का अधिकार केवल न्यायालय को है, न कि पुलिस को। पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से इस तरह अपमानित करना भारतीय संविधान और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

परिजनों ने आरोप लगाया कि इस घटना से चित्रसेन साहू की मानसिक स्थिति पर गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि भविष्य में आरोपी का मानसिक संतुलन बिगड़ता है या वह किसी भी प्रकार की गंभीर या हिंसक घटना करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस कर्मियों की होगी।

इस मामले को गंभीर बताते हुए परिजनों ने मानवाधिकार आयोग रायपुर एवं रायगढ़ कलेक्टर को लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है तथा दोषी पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, चित्रसेन साहू के अधिवक्ता ने भी पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी की जमानत के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया है। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि महिला पुलिस आरक्षक के साथ हुई घटना निंदनीय है और कानून के तहत उस पर कार्रवाई आवश्यक है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि पुलिस कानून अपने हाथ में ले।

अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस स्वयं आम नागरिकों को कानून हाथ में न लेने की सीख देती है लेकिन आरोपी के साथ की गई सार्वजनिक और सामाजिक रूप से दंडात्मक कार्रवाई संविधान के मूल सिद्धांतों और मानवाधिकारों के विपरीत है। इस घटना से आरोपी और उसके परिवार को गहरी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासनिक एवं मानवाधिकार स्तर पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है, वहीं पुलिस की भूमिका और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

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