नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के सक्रिय सहयोग से यहां तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठी- अभ्युदय-3 का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य तकनीकी हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की पहुंच समाज के व्यापक वर्गों तक विस्तारित करना था।

इस दो दिवसीय संगोष्ठी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए नवीनतम नवाचारों और विकास तथा उनके सामाजिक संबंधों पर शोध अध्ययन के परिणाम प्रस्तुत किए गए। इस संगोष्ठी में शोधार्थियों ने 25 शोध पत्र प्रस्तुत किये, जिनमें मुख्य रूप से औषधीय पौधों के जैव विविधता मूल्य, जैविक अपशिष्ट निपटान, मानव-एआई सहयोग, प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक नवाचार, राजभाषा एवं प्रौद्योगिकी का संगम जैसे विषय शामिल थे।

दिल्ली स्थित सीएसआईआर की एक प्रयोगशाला के तौर पर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर विज्ञान संचार एवं साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान के लिए अधिकृत है। संस्थान ने हिंदी भाषा के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच के अंतर को दूर करने के उद्देश्य से आयोजित संगोष्ठी की अवधारणा और समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान निरंतर वैज्ञानिक ज्ञान को आम जनता तक, विशेष रूप से भारतीय भाषाओं के माध्यम से, सुलभ बनाने की दिशा में कार्यरत है, ताकि विज्ञान संचारकों, छात्रों, शिक्षकों, नवप्रवर्तकों और नागरिकों को वैज्ञानिक ज्ञान को बेहतर ढंग से समझने और लागू करने में सहायता मिल सके।

इस कार्यक्रम के दौरान, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक और लोकप्रिय विज्ञान प्रभाग के प्रमुख श्री सीबी सिंह ने तकनीकी हिंदी और प्रभावी विज्ञान संचार के महत्व उल्लेख किया, जिससे अनुसंधान और नवाचार को समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने हिंदी में वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के निरंतर प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिसमें 1952 से लोकप्रिय विज्ञान पत्रिका "विज्ञान प्रगति" का प्रकाशन भी शामिल है।

आईआईटी इंदौर के निदेशक, प्रोफेसर सुहास जोशी ने तकनीकी शिक्षा में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की पहलों का उल्लेख किया, जिनमें विज्ञान पर हिंदी में चर्चा, निर्धारित आधिकारिक भाषा मानकों के अनुसार पीएचडी शोधपत्रों का संकलन और अवधारणात्मक स्पष्टता बढ़ाने के लिए कुछ स्नातक व्याख्यानों का हिंदी में संचालन शामिल है।

आईआईटी जोधपुर के निदेशक, प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल ने कहा कि संगोष्ठी ने हिंदी में सार्थक तकनीकी चर्चा की शुरुआत की है और तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान में इसके उपयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस संगोष्ठी में देशभर के प्रख्यात शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, राजभाषा अधिकारियों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र, शोधपत्र प्रस्तुति, आमंत्रित वार्ताएं, पैनल चर्चाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, स्टार्टअप, उच्च शिक्षा और प्रशासन में हिंदी के उपयोग जैसे समकालीन विषयों पर विशेष व्याख्यान शामिल थे।

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