किशनगंज , फरवरी 23 -- त्मा-सुपौल के सौजन्य से सोमवार से बुधवार तक तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम " ड्रैगन फ्रूट और चाय की खेती और विपणन " विषय पर केंद्रित है। प्रशिक्षण का उद्देश्य उत्तर-पश्चिमी बिहार के किसानों कों को ड्रैगन फ्रूट और चाय की वैज्ञानिक खेती की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना है।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और वैज्ञानिक, डॉ. बीरेंद्र प्रसाद, ने की। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ड्रैगन फ्रूट और चाय जलवायु परिवर्तन के इस युग में किसानों के लिए एक आशाजनक विकल्प है। इसकी खेती से न केवल आय में वृद्धि होगी, बल्कि पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
इस अवसर पर डॉ. केविन क्रिस्टोफर, डॉ. अंजलि सुधाकर, डॉ. नेसरा बेगाने, डॉ. सागरिका भौमिक और डॉ. कृष्णा डी.के., एवं महाविद्यालय के वैज्ञानिक-शिक्षकगण तथा आत्मा-सुपौल के प्रतिनिधिगण भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को ड्रैगन फ्रूट और चाय की प्रजातियों, रोपण तकनीक, जल व पोषक प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण, उत्पादन लागत, मूल्य संवर्धन, और बाजार उपलब्धता की संपूर्ण जानकारी प्रदान करना है।
प्रशिक्षण सत्रों का संचालन महाविद्यालय के अनुभवी वैज्ञानिकों द्वारा किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों को एक प्रगतिशील किसान के ड्रैगन-फ्रूट और चाय के बागवानी क्षेत्र का भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे प्रत्यक्ष रूप से खेती की तकनीकों, रख-रखाव एवं विपणन की रणनीतियों को देख सकेंगे और किसान से संवाद कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।
यह प्रशिक्षण न केवल स्थानीय कृषकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों लिए लाभकारी सिद्ध होगा, बल्कि उत्तर-पश्चिमी बिहार में ड्रैगन फ्रूट और चाय जैसी उच्च मूल्य की फसल को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक सराहनीय पहल है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित