काराकास , जनवरी 04 -- वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शनिवार देर रात उप राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने तत्काल प्रभाव से कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाल लिया है।
यह आदेश अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन 'एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सैनिकी की गिरफ्तारी के बाद आया ।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश कैरिस्लिया रोड्रिग्ज ने सरकारी टीवी चैनल वीटीवी पर प्रसारित एक बयान में कहा था, "राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण से उत्पन्न असाधारण स्थिति को देखते हुए यह आदेश दिया जाता है कि गणतंत्र की कार्यकारी उपराष्ट्रपति कार्यवाहक क्षमता में राष्ट्रपति पद की सभी शक्तियों, कर्तव्यों और कार्यों को संभालें। यह निर्णय प्रशासनिक निरंतरता और राष्ट्र की व्यापक रक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।"वेनेजुएला का संविधान अनुच्छेद 233 और 234 के तहत ऐसी स्थितियों का प्रावधान करता है, जो राष्ट्रपति की अस्थायी या पूर्ण अनुपस्थिति की स्थिति में उपराष्ट्रपति को पदभार संभालने की अनुमति देते हैं।
श्री मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को हिरासत में लिए जाने के कुछ ही घंटों बाद, जस्टिस रोड्रिग्ज ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने मादुरो दंपति की 'तत्काल रिहाई' की मांग की और अमेरिकी ऑपरेशन की निंदा करते हुए इसे 'अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का खुला उल्लंघन' बताया।
जस्टिस रोड्रिग्ज ने इस बात पर जोर दिया कि श्री मादुरो ही वेनेजुएला के एकमात्र वैध राष्ट्रपति हैं। उन्होंने वेनेजुएला के लोगों से इस ऑपरेशन का विरोध करने का आग्रह किया और मध्य अमेरिकी देशों की सरकारों से इसकी निंदा करने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने वेनेजुएला के लोगों और क्षेत्र के खिलाफ अमेरिका द्वारा किए गए गंभीर सैन्य हमले और श्री मादुरो और उनकी पत्नी के अपहरण की कड़ी निंदा की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई वेनेजुएला के संविधान, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है, जिसका उद्देश्य वेनेजुएला के रणनीतिक संसाधनों पर कब्जा करना है।
उल्लेखनीय है कि श्री मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को शनिवार सुबह वेनेजुएला के खिलाफ एक बड़े अमेरिकी सैन्य अभियान में पकड़ लिया गया था। इसी बीच अमेरिकी स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, श्री मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क में एक सैन्य अड्डे पर ले जाया गया है।
चीन ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए अमेरिका से मांग की है कि वह मादुरो दंपती को 'तत्काल' रिहा करे। चीन ने चेतावनी दी है कि किसी संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल का ऐसा प्रयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। चीनी विदेश मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान में अमेरिका से वेनेजुएला की सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें बंद करने और विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकालने का आग्रह किया गया है।
दूसरी ओर रविवार को अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान को 'युद्ध की कार्रवाई' और 'अंतरराष्ट्रीय एवं संघीय कानून का उल्लंघन' बताया। श्री ममदानी ने कहा कि सत्ता परिवर्तन की यह खुलेआम कोशिश न केवल विदेशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को प्रभावित करती है, बल्कि इसका सीधा असर न्यूयॉर्क निवासियों पर भी पड़ता है, जिनमें वेनेजुएला के हजारों नागरिक भी शामिल हैं ।
अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'अवैध और नासमझी भरा' कदम बताया।
श्रीमती हैरिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप के कदम अमेरिका को अधिक सुरक्षित, मजबूत या समृद्ध नहीं बनाते।" उन्होंने स्वीकार किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो एक 'क्रूर और अवैध तानाशाह' हैं, लेकिन यह अमेरिकी कार्रवाई को उचित नहीं ठहराता।
पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, "मादुरो का एक क्रूर और अवैध तानाशाह होना इस तथ्य को नहीं बदलता कि यह कार्रवाई अवैध और नासमझी भरी थी। अमेरिकी जनता यह नहीं चाहती और वे झूठ सुनकर थक चुके हैं।"इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने शनिवार को घोषणा की कि वह वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी अभियान पर सोमवार को एक आपातकालीन बैठक आयोजित करेगी।
इसी बीच अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विरोध में रविवार को सैकड़ों अमेरिकी नागरिक मैनहट्टन की सड़कों पर उतरे। यह मार्च वाशिंगटन, बोस्टन, लॉस एंजिल्स, अटलांटा, शिकागो और मियामी जैसे 100 से अधिक अमेरिकी शहरों में होने वाले 'वेनेजुएला पर कोई युद्ध नहीं' प्रदर्शनों का हिस्सा था।
न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों के हाथों में 'वेनेजुएला से हाथ हटाओ', 'कैरिबियन से अमेरिका बाहर निकले', 'वेनेजुएला के तेल के लिए कोई युद्ध नहीं', और 'अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ वेनेजुएला की रक्षा करो' लिखे हुए पोस्टर थे। भीड़ में 'वेनेजुएला की रक्षा करो, मादुरो को आजाद करो' के नारे भी गूंज रहे थे।
मार्च में शामिल न्यूयॉर्क के निवासी करेन ने कहा, "यह युद्ध मादक पदार्थों के बारे में नहीं है, यह वेनेजुएला के तेल के बारे में है। आपको वेनेजुएला में कदम रखने और वहां हमला करने का अधिकार कैसे है? ऐसा महसूस होता है जैसे हम अपराधियों की तरह काम कर रहे हैं। हम यहां यह कहने आए हैं कि यह एक अन्यायपूर्ण कार्रवाई है।"पाकिस्तान के एक कॉलेज छात्र हसन ने कहा कि विदेशों में अमेरिका के नेतृत्व में सरकार बदलने के प्रयास नए नहीं हैं, 'लेकिन कम से कम पहले यह नकाब पहनकर किया जाता था, जैसे मध्य पूर्व में लोकतंत्र बहाल करने के नाम पर।' उन्होंने कहा कि हालांकि, आज इसने नकाब उतार दिया है। यह काफी स्पष्ट रूप से तेल और प्राकृतिक संसाधनों के बारे में है।
टाइम्स स्क्वायर रैली में एक वक्ता ने इसके जवाब में कहा, "ऐसा नहीं होने वाला है। यह अहंकार है। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला अमेरिका को अपना सारा तेल, आपनी सारी जमीन, अपनी सारी संपत्ति सौंप दें।" उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के लोग अपने देश को चलाने वाले या अपने तेल, गैस, सोने या किसी भी संसाधन को चुराने वाले अमेरिका को स्वीकार नहीं करेंगे। वहां कड़ा प्रतिरोध होगा। नहीं, वह युग अब खत्म हो गया है।
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