जालंधर , दिसंबर 06 -- सेना ने पंजाब के डेरा बाबा नानक में 54वें डीबीएन दिवस के अवसर पर शनिवार को 1971 में 'ऑपरेशन अकाल' में भाग लेने वाले डोगराई ब्रिगेड के वीर सैनिकों की वीरता को श्रद्धापूर्वक याद किया। ऑपरेशन अकाल, पश्चिमी मोर्चे पर वज्र कोर द्वारा किया गया एक बड़ा आक्रमणथा, जिसका उद्देश्य शकरगढ़ सेक्टर में पाकिस्तान की पहली कोर को घेरना और दुश्मन सेना की पुनः तैनाती को रोकना था।
समारोह की शुरुआत एक गरिमामय पुष्पांजलि समारोह से हुई , जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों के परिवारों, पूर्व सैनिकों और नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर, उन वीर सैनिकों की वीरता, व्यावसायिक दक्षता और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि दी गयी, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं का निर्वहन किया।
बैठक को संबोधित करते हुए, मेजर जनरल कार्तिक सी. शेषाद्रि, वीएसएम ने ऑपरेशन अकाल की स्थायी विरासत और इसके परिचालन महत्व पर प्रकाश डाला और पश्चिमी मोर्चे पर उच्चतम परिचालन तत्परता बनाए रखने और राष्ट्र की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहने के लिए भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम के दौरान, पूर्व सैनिकों और स्थानीय नागरिकों के साथ आत्मीय बातचीत हुई, जिससे सेना और नागरिकों के बीच शाश्वत संबंध और मजबूत हुए तथा सैन्य-नागरिक साझेदारी की भावना को बल मिला। समारोह से पहले आयोजित सांस्कृतिक और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों में भारतीय सेना की सेवा भावना और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की झलक देखने को मिली।
इस कार्यक्रम का समापन भारतीय सेना द्वारा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़, सतर्क और प्रतिबद्ध रहने की पुनः प्रतिज्ञा के साथ हुआ , साथ ही डीबीएन योद्धाओं की गौरवशाली विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी, जिनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
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