रांची , फरवरी 13 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में डीजीपी नियुक्ति को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
श्री मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश के बाद अब यह तय हो गया है कि एक महीने के भीतर 'प्रकाश सिंह जजमेंट' के तहत यूपीएससी से अनुमोदित सूची में से ही डीजीपी की नियुक्ति करनी होगी।
श्री मरांडी ने कहा कि इस आदेश के बाद झारखंड सरकार को भी कानून के अनुरूप प्रक्रिया अपनानी ही पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी की नियुक्ति में राज्य सरकार की अंधेरगर्दी और मनमानी के खिलाफ उन्होंने जो लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, उसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।
श्री मरांडी ने वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रिटायर होने के बाद भी वे गैरकानूनी तरीके से डीजीपी के पद पर कार्य कर रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर अधिकारी मानते रहे हैं। मरांडी ने उनसे अनुरोध किया कि वे कानून की बारीकियों को समझें और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में स्वयं पद छोड़ दें, ताकि उन्हें पद से हटाए जाने की नौबत न आए।
उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि सेवा काल में किसी बड़े विवाद से दूर रहने वाली अधिकारी आखिर किस वजह से अपने पूरे करियर की साख को दांव पर लगाना चाहेंगी।
मरांडी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई यहीं रुकने वाली नहीं है।
श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में अब तक गलत तरीके से नियुक्त और पद पर रहे सभी डीजीपी द्वारा वेतन व अन्य मद में ली गई राशि की वसूली, उनके कार्यकाल के निर्णयों की समीक्षा और संपत्ति की जांच के लिए वे झारखंड हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
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