रांची , जनवरी 20 -- झारखंड की राजधानी रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें "23वीं सदी के हिंदी साहित्य में अभिव्यक्ति और आदिवासी जीवन संदर्भ" विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
संगोष्ठी का उद्देश्य बदलते समय में हिंदी साहित्य की दिशा, उसकी अभिव्यक्ति तथा आदिवासी समाज से जुड़े जीवन मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना रहा।
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में विद्वानों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाग लिया। नेपाल और श्रीलंका सहित दिल्ली विश्वविद्यालय से आए प्रतिनिधियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वहीं झारखंड के विभिन्न जिलों से सैकड़ों शिक्षाविद, प्रोफेसर, शोधार्थी और विद्यार्थी इस आयोजन में शामिल हुए, जिससे विश्वविद्यालय परिसर पूरी तरह अकादमिक माहौल से सराबोर रहा।
संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने आज कहा कि हिंदी साहित्य अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। विशेष रूप से आदिवासी जीवन, संस्कृति, परंपरा और संघर्ष को साहित्य के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की बड़ी आवश्यकता है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि 23वीं सदी के संदर्भ में साहित्य को केवल कल्पना तक सीमित न रखकर सामाजिक यथार्थ, वैज्ञानिक दृष्टि और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ना होगा।
इस अवसर पर पूर्व आईएएस अधिकारी एवं प्रख्यात हिंदी साहित्यकार रनेंद्र ने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक और बौद्धिक आयोजनों से विद्यार्थियों में सोचने-समझने की क्षमता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं रही, बल्कि नेपाल, श्रीलंका जैसे देशों में भी हिंदी साहित्य को लेकर जागरूकता और रुचि तेजी से बढ़ रही है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच हिंदी भाषा और साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें आदिवासी जीवन, उसकी संवेदनाएं, सामाजिक चुनौतियां और सांस्कृतिक धरोहर पर केंद्रित शोध पत्रों का वाचन हुआ। विद्यार्थियों ने भी संगोष्ठी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से संवाद कर अपने विचार साझा किए।
आयोजकों ने बताया कि इस तरह की संगोष्ठियां न केवल साहित्यिक विमर्श को मजबूत करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण भी प्रदान करती हैं। कार्यक्रम के समापन सत्र में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने की बात कही।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित