अलवर , जनवरी 16 -- राजस्थान में आरक्षण की मांग को लेकर विमुक्त जनजातियां (डीएनटी), घुमंतू, अर्द्ध घुमंतू एवं विमुक्त समाज सहित 32 समाज के लोग 18 जनवरी को अलवर के भर्तृहरि धाम में एक महासंगम आयोजित करेंगे।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज की लंबित 10 सूत्री मांगों को लेकर सरकार पर प्रभावी दबाव बनाना है। नाथ समाज के नेतृत्व में होने वाले इस महासंगम में राजस्थान सहित विभिन्न जिलों से हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

आयोजक पुखराज योगी ने शुक्रवार को बताया कि डीएनटी समाज की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत पृथक आरक्षण शामिल है। रेनके और ईदाते आयोग पहले ही इसकी सिफारिश कर चुके हैं। उच्चतम न्यायालय ने भी आरक्षण के उपवर्गीकरण के फैसले में आरक्षण के भीतर आरक्षण की व्यवस्था को मान्यता दी है। समाज ने अपनी मांगों के समर्थन में पहले पाली जिले के बालराई में एक बड़ा आंदोलन किया था। इस आंदोलन में हजारों लोग शामिल हुए थे और करीब 30 घंटे तक राजमार्ग अवरुद्ध रहा था।

उन्होंने बताया कि पिछले आंदोलन के बाद पांच दिसम्बर 2025 को डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका और प्रदेशाध्यक्ष रतननाथ के नेतृत्व में सरकार से वार्ता हुई थी। इस दौरान आरक्षण के अतिरिक्त पट्टे, आवास एवं भूमि आवंटन, पंचायतों में राजनीतिक आरक्षण, शिक्षा एवं छात्रावासों के लिए अधिक बजट, कला महाविद्यालय की स्थापना सरकार ने इन सभी मांगों पर विचार के लिए दो महीने का समय मांगा था, जिसकी अवधि पांच फरवरी को समाप्त हो रही है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि मांगें नहीं मानी गयीं, तो दोबारा बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

नाथ समाज, जो डीएनटी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। नाथ समाज के नव निर्वाचित प्रदेशाध्यक्ष सत्यम योगी ने कहा कि भर्तृहरि जी की तपोभूमि में होने वाला यह महासंगम डीएनटी अधिकारों के लिए ऐतिहासिक आंदोलन साबित होगा। इस महासंगम में डीएनटी के सभी 32 समाज शामिल होंगे।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय पशुपालक संघ के अध्यक्ष लालजी राइका, घुमंतू-अर्धघुमंतू विमुक्त जाति परिषद के प्रदेशाध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया, डीएनटी बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष उर्मिला योगी सहित कई समाजों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

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