नयी दिल्ली , जनवरी 01 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति संगठन की पेशेवर क्षमता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। श्री सिंह ने गुरुवार को यहां डीआरडीओ मुख्यालय में 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस कर भारत की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए संगठन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान डीआरडीओ के उपकरणों ने निर्बाध रूप से कार्य किया जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डीआरडीओ 'सुदर्शन चक्र' प्रणाली के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस पहल के तहत डीआरडीओ को अगले एक दशक में देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की पूर्ण हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वायु रक्षा प्रणाली से सुसज्जित करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा," ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायु रक्षा प्रणाली के महत्व को हमने देखा है। मुझे विश्वास है कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेगा।" श्री सिंह ने निजी क्षेत्र के साथ डीआरडीओ के सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योग, शिक्षाजगत और स्टार्ट-अप के साथ बढ़ती सहभागिता से एक समन्वित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ ने अपनी प्रणालियों, प्रक्रियाओं और कार्यशैली में निरंतर सुधार किया है। खरीद प्रक्रिया से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग के साथ जुड़ाव से लेकर स्टार्ट-अप के साथ सहयोग तक, कार्य को सरल, तेज और अधिक विश्वसनीय बनाने के स्पष्ट प्रयास दिखाई देते हैं।
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ का आह्वान किया कि वह तेजी से विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढे और बदलते समय के अनुरूप उत्पाद विकसित करे। उन्होंने संगठन से नवाचार पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया।
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