नैनीताल , मार्च 24 -- पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एवं नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर कुमाऊं क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्रयोगशाला रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (डीआईबीईआर) वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई है।

सांसद ने रक्षा मंत्री को पत्र सौंपते हुए कहा कि इस प्रयोगशाला के लगभग बंदी की स्थिति में पहुंचने और इसे डीआईपीएएस, तिमारपुर (दिल्ली) से संबद्ध कर एक छोटी इकाई में सीमित किए जाने से क्षेत्र में असंतोष और संशय की स्थिति पैदा हो गई है।

उन्होंने बताया कि डीआईबीईआर की सक्रियता कम होने से स्थानीय युवाओं के रोजगार, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप जैसे अवसरों में भारी गिरावट आई है। साथ ही स्थानीय व्यापार, उद्योग और उच्च हिमालयी क्षेत्रों के किसानों को मिलने वाला वैज्ञानिक कृषि परामर्श भी प्रभावित हुआ है।

सांसद भट्ट ने जानकारी दी कि यह प्रयोगशाला 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद स्थापित की गई थी और इसका नेटवर्क हल्द्वानी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, औली (चमोली) और हर्षिल (उत्तरकाशी) तक फैला है। जिसमें लगभग 300 एकड़ भूमि पर विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है लेकिन वर्तमान में अधिकांश केंद्र निष्क्रिय हैं और सीमित कर्मचारी ही कार्यरत हैं जिससे संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में डीआईबीईआर को तिमारपुर की एक "परजीवी इकाई" के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है, जबकि डीआईपीएएस का मुख्य कार्य उच्च हिमालयी परिस्थितियों में सैनिकों की शरीर क्रिया का अध्ययन करना है, जो मैदानी क्षेत्र में प्रभावी रूप से संभव नहीं है।

सांसद ने रक्षा मंत्री से मांग की कि डीआईपीएएस संस्थान को उत्तराखंड में स्थानांतरित किया जाए ताकि यहां उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सके और वैज्ञानिक अनुसंधान अपने वास्तविक उद्देश्यों के अनुरूप संचालित हो सके।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और शोध के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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