दरभंगा , जनवरी 19 -- बिहार के वरिष्ठ पत्रकार प्रो. हरिनारायण सिंह ने लोकतंत्र में डिजिटल मीडिया के सकारात्मक एवं नकारात्मक पहलुओं की चर्चा करते हुए सोमवार को कहा कि जहां डिजिटल मीडिया ने एक ओर सूचना के प्रसार को लोकतांत्रिक बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसने परम्परागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता, प्रासंगिकता और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।

प्रो. सिंह ने आज यहां स्वर्गीय रामगोविन्द प्रसाद जी की 30वीं पुण्यतिथि के अवसर पर "डिजिटल युग मे परम्परागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता" विषयक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक युग में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं रही। उन्होंने कहा कि परम्परागत पत्रकारिता, जो कभी समाचार पत्रों, रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से जनता तक सूचनायें पहुंचाने का प्रमुख साधन थी, अब डिजिटल युग की पत्रकारिता के उदय के साथ नई चुनौतियों का सामना कर रही है। डिजिटल मीडिया ने जहाँ एक ओर सूचना के प्रसार को लोकतांत्रिक बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसने परम्परागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता, प्रासंगिकता और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।

श्री सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने सूचना के उत्पादन, वितरण और उपभोग के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां समाचार संगठनों के पास सूचना के प्रसार का एकाधिकार था, वहीं अब कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के माध्यम से समाचार बना सकता है और उसे विश्व भर में फैला सकता है। यह लोकतंत्रीकरण जहाँ सकारात्मक है, वहीं इसके कई नकारात्मक प्रभाव भी हैं। उन्होंने कहा कि परम्परागत पत्रकारिता में समाचारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सख्त सम्पादकीय प्रक्रियायें और तथ्य-जांच के मानक होते थे। समाचार संगठनों में प्रशिक्षित पत्रकार और सम्पादक यह सुनिश्चित करते थे कि जनता तक केवल सत्यापित और सटीक जानकारी ही पहुँचे। इसके विपरीत, सोशल मीडिया पर सूचनाएँ बिना किसी सम्पादकीय निगरानी के प्रसारित होती हैं। यहाँ झूठी खबरें (फेक न्यूज़), अफवाहें और गलत सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं।

मुख्य अतिथि राजकीय शेखपुरा अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सन्दीप तिवारी ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया ने समाचार चक्र को अत्यधिक तीव्र कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले समाचार पत्र अगले दिन छपते थे, और टेलीविजन समाचार भी कुछ घंटों के अंतराल पर प्रसारित होते थे। लेकिन अब सोशल मीडिया पर समाचार सेकंडों में विश्व भर में फैल जाता है। इस तीव्रता ने परम्परागत पत्रकारिता पर दबाव डाला है कि वे भी तुरंत समाचार प्रदान करें। इस जल्दबाजी में तथ्यों की जांच और गहन विश्लेषण की प्रक्रिया अक्सर प्रभावित होती है, जिससे पत्रकारिता की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। उन्होंने किसी बड़ी घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर उससे संबंधित अपुष्ट जानकारी और वीडियो वायरल हो जाते हैं, जबकि परम्परागत समाचार संगठन उस जानकारी को सत्यापित करने में समय लेते हैं। इस बीच, जनता पहले से ही सोशल मीडिया की जानकारी पर प्रतिक्रिया दे चुकी होती है, जिससे परम्परागत पत्रकारिता की प्रासंगिकता कम होती प्रतीत होती है।

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