नयी दिल्ली , दिसंबर 05 -- भारतीय रेल ट्रेनों के समय-पालन के मामले में कई यूरोपीय देशों के रेलवे नेटवर्क से बेहतर स्थिति में पहुंच गयी है।

रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्य सभा में एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि समय-पालन के मामले में भारतीय रेल की सफलता दर 80 प्रतिशत है. जो बहुत ही बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, " रेलवे के करीब 70 मंडल में से 25 मंडल में ट्रेनों के समय-पालन का प्रतिशत 90 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है।"उन्होंने बताया कि सड़क के ऊपर बने पुल (आरओबी) और भू पथ मार्ग (आरयूपी) की नीति पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि यह सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कारक है। पुलों में से लगभग 100 के आसपास के लिए मानक डिजाइन बनाई गयी हैं, जिससे कोई भी विभाग जल्दी से जल्दी इसे पास करवा सके।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश में रेलवे के विकास के काफी काम हुए हैं। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के लिए बजट बढ़ाया है, वह वाकई एक ऐतिहासिक कदम है। यदि आंकड़े देखें तो 2014 से पहले उत्तर प्रदेश के लिए मात्र 1,100 करोड़ रुपये का बजट होता था, जो आज 18 गुना बढ़कर 19,800 करोड़ रुपये हो गया है।

उन्होंने कहा कि भारत गौरव ट्रेन के सर्किट में पहली ट्रेन रामायण सर्किट के जरिये जितने भी यात्री बिहार के बक्सर गए, वहाँ पहुँचकर उन्होंने उस स्थान का अविस्मरणीय अनुभव किया। बक्सर स्टेशन का नवनिर्माण पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थीम पर किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के बलिया में 82 ट्रेन सेवाएं संचालित हो रही हैं। साथ ही बलिया स्टेशन का पूरी तरह से नवनिर्माण किया जा रहा है, जिसमें बलिया की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को स्टेशन की बनावट में शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे देशभर में स्टेशनों के समग्र और चरणबद्ध विकास के लिए 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत तेजी से कार्य कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल सेवाएं उपलब्ध कराना है। देशभर में अब तक 1,337 रेलवे स्टेशनों को इस योजना में शामिल किया गया है, जिनमें से 157 स्टेशन उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।

उन्होंने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत तैयार मास्टर प्लान में स्टेशन भवन और परिचालन क्षेत्र में सुधार, शहर के दोनों हिस्सों से बेहतर एकीकरण, आधुनिक प्रतीक्षालय, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, चौड़े फुट ओवर ब्रिज, एस्केलेटर, लिफ्ट, रैंप और दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, स्थानीय उत्पादों के लिए 'एक स्टेशन एक उत्पाद' कियोस्क, पार्किंग, उन्नत यात्री सूचना प्रणाली, लैंडस्केपिंग और पर्यावरण अनुकूल समाधान भी शामिल हैं।

इस दौरान रेल मंत्री ने कवच के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है। यह तकनीकी रूप से अत्यधिक गहन प्रणाली है, जिसके लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन (एसआईएल-4) की आवश्यकता होती है। कवच, लोको पायलट द्वारा ब्रेक लगाने में असफल रहने की स्थिति में स्वचालित ब्रेक लगाकर रेलगाड़ियों को निर्दिष्ट गति सीमा के अंदर चलाने में लोको पायलट की सहायता करता है तथा खराब मौसम के दौरान रेलगाड़ियों को सुरक्षित रूप से चलाने में भी मदद करता है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण मध्य रेलवे पर 1465 मार्ग किलोमीटर पर कवच संस्करण 3.2 की तैनाती और प्राप्त अनुभव के आधार पर इसमें और सुधार किए गए। अब कवच संस्करण 4.0 में विविध रेलवे नेटवर्क के लिए आवश्यक सभी प्रमुख विशेषताएँ शामिल हैं। यह भारतीय रेलवे की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

ट्रेन में खाली होने वाली निचली सीट को वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों या गर्भवती महिलाओं (जिन्हें मध्य/ऊपरी बर्थ आवंटित किया गया है) को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, सुरक्षा और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन और विकसित किए गए विभिन्न प्रकार के कोच उपलब्ध कराए गए हैं। आरक्षित डिब्बों में प्रवेश और निकास द्वार चिह्नित होते हैं। 'प्रवेश' और 'निकास' के ये संकेत बॉडी साइड प्रवेश द्वारों के पास लगाए गए हैं। सामान्य डिब्बों में, किसी भी द्वार से प्रवेश और निकास किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, भारतीय रेलवे सभी यात्रियों के लिए कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य उनकी यात्रा के दौरान आराम और सुविधा को बढ़ाना है।

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