नयी दिल्ली , जनवरी 08 -- पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर नए प्रतिबंध लगाने की धमकी के मद्देनजर, भारतीय कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल का आयात कम कर दिया है या पूरी तरह से रोक दिया है।
भारत ने हालांकि आधिकारिक रूप से कहा है कि उसे किसी भी स्रोत से कच्चे तेल की खरीद करने का अधिकार है लेकिन उसने चुपचाप रूस से खरीद को कम कर दिया है जबकि अमेरिका से आयात में वृद्धि हुई है। अधिकारियों ने कहा कि भारत रूस के साथ अपने रक्षा एवं परमाणु सहयोग का विस्तार कर रहा है और रूस को संयुक्त उद्यमों में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है जबकि दोनों देशों के बीच तेल व्यापार में कमी आयी है।
विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव (आर्थिक संबंध) पिनाक आर चक्रवर्ती ने कहा, "हम रूल पर तेल की अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं लेकिन कच्चे तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं करेंगे। हालांकि, हम रूस को भारतीय उत्पादों की ज्यादा खरीद करने और उनके पास मौजूद भारतीय रुपयों के विशाल भंडार का उपयोग कर संयुक्त उद्यमों में ज्यादा निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं।"सरकारी तेल रिफाइनरियों को चुपचाप रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति कम करने और गैर-प्रतिबंधित कंपनियों से अपनी खरीद सीमित करने की सलाह दी गई है जबकि दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनियों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का कहना है कि उसे पिछले तीन हफ्तों से कोई रूसी कच्चा तेल नहीं मिला है और न ही इस महीने मिलने की उम्मीद है।
भारत ने किसी एक देश से तेल आयात को अपनी कुल कच्चे तेल की खरीद का 25 प्रतिशत से ज्यादा नहीं रखने का नीतिगत निर्णय भी लिया है। यह कदम भू-राजनीतिक जोखिमों को सीमित करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के अपने दीर्घकालिक उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने इस कदम को एक संस्थागत सुरक्षा उपाय, अस्थिर होते वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक "शॉक एब्जॉर्बर" के रूप में वर्णित किया है। सभी निर्णय ऐसे समय में लिए गए हैं जब अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंधों का विस्तार करने के द्विदलीय प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है जो संभावित रूप से चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों को भी लक्षित कर सकता है जो रूसी तेल की खरीद जारी रखते हैं।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि श्री ट्रम्प ने हाल ही में हुई एक बैठक के दौरान अपनी मंजूरी दी है, जिससे 'रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला अधिनियम 2025' नामक विधेयक के लिए कांग्रेस में मतदान का रास्ता साफ हो गया है, जो संभवतः अगले सप्ताह की शुरुआत में हो सकता है। रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने इस सप्ताह की शुरुआत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उसे दिसंबर-जनवरी में रूसी कच्चे तेल की न तो कोई आपूर्ति मिली है और न ही मिलने की उम्मीद है।
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से प्रभावित होने के बाद रूस द्वारा दी गई भारी छूट के बाद भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने 2022 से रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया था और 2025 में भारत में कच्चे तेल की खरीद का 35 प्रतिशत हिस्सा अकेले रूसी बंदरगाहों से आया था। अधिकारियों ने कहा, "भारत द्वारा अमेरिकी कच्चे तेल का आयात 2025 के अंत में तेजी से बढ़ा और अक्टूबर में यह कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो लगभग 5.4 लाख से 5.75 लाख बैरल प्रति दिन था। नवंबर 2025 तक अमेरिका भारत का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया और यह प्रवृत्ति बढ़ रही है।"श्री चक्रवर्ती के अनुसार, भारतीय व्यापार अधिकारियों ने यह भी कहा कि रूस के साथ भारत का सहयोग बढ़ रहा है खासकर पिछले महीने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ नयी दिल्ली में शिखर सम्मेलन के बाद। उन्होंने कहा कि श्री पुतिन की यात्रा ने रक्षा एवं परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हमारे बढ़ते संयुक्त उद्यमों को निश्चित रूप से बढ़ावा मिला है।"रूस के साथ भारत के रक्षा एवं परमाणु सहयोग में तेजी आई है और द्विपक्षीय व्यापार लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। भारत ने पिछले दो दशकों में 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के रूसी हथियार आयात किए हैं हालांकि भारत द्वारा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने के कारण भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 2009-13 में 76 प्रतिशत से घटकर 2019-23 में लगभग 36 प्रतिशत हो गई है।
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