महासमुंद/रायपुर, दिसंबर 06 -- छत्तीसगढ में महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम सेनभाठा में धान तौलाई और टोकन व्यवस्था की अव्यवस्था से हताश एक 65 वर्षीय किसान ने शनिवार को ब्लेड से अपना गला काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया।

जानकारी के अनुसार कथित तौर पर तीन दिनों तक टोकन नहीं मिलने से परेशान किसान मनबोध गाड़ा ने आज सुबह खेत में ब्लेड से अपना गला काट लिया। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद उन्हें 112 की मदद से बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर महासमुंद मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर मेकाहारा रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है। परिवार ने बताया कि मनबोध लगातार च्वाइस सेंटर जाकर टोकन कटवाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन, तकनीकी समस्याओं के कारण सफलता नहीं मिली थी।

किसान के परिजन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने धान खरीदी केंद्रों में हो रही लापरवाही को इसकी सीधी वजह बताया है, हालांकि जिला प्रशासन ने आरोपों से इनकार करते हुए जांच की बात कही है। मनबोध गाड़ा के पास एक एकड़ 40 डिसमिल कृषि भूमि है और वह परिवार के 11 सदस्यों का भरण-पोषण करते थे।

घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे ''सरकार की प्रताड़ना'' और ''किसान हत्यारी नीतियों'' का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, ''पूरा प्रदेश धान खरीदी की अव्यवस्था से जूझ रहा है। किसानों को रकबा के आधार पर जितनी खरीदी होनी चाहिए, वह नहीं हो रही है। मनोबोध गाड़ा जैसे किसान टोकन के लिए चक्कर लगाते-लगाते हताश हो गए हैं।''श्री बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अपने ही खरीद लक्ष्य को एनआईसी के माध्यम से घटाकर किसानों को कम धान बेचने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने मांग की कि घायल किसान के इलाज का समुचित प्रबंध सरकार तत्काल सुनिश्चित करे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित