भोपाल , मार्च 03 -- नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने मंगलवार शाम इस वर्ष के पहले चंद्रग्रहण का टेलिस्कोप के माध्यम से अवलोकन कराया और इसके वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना घटित होती है। इसे सामान्यतः बिना किसी विशेष चश्मे के भी देखा जा सकता है, हालांकि टेलिस्कोप से इसका दृश्य अधिक स्पष्ट और आकर्षक दिखाई देता है।
होली के अवसर पर हुए इस ग्रहण के समय चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3 लाख 80 हजार किलोमीटर दूर था। ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया पड़ने से चंद्रमा ताम्र लाल आभा में दिखाई दिया। आंशिक चंद्रग्रहण शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहा, इसके बाद उपछाया ग्रहण की अवधि 7 बजकर 53 मिनट तक रही।
सारिका ने बताया कि उपछाया ग्रहण की धार्मिक मान्यता भले न हो, किंतु वैज्ञानिक दृष्टि से जब चंद्रमा उपछाया में होता है तो उसे सूर्य का पूर्ण प्रकाश नहीं मिल पाता, जिससे उसका रंग हल्का पीला दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि खगोलीय दृष्टिकोण से यह अत्यंत रोचक और दुर्लभ दृश्य था, जिसे टेलिस्कोप के माध्यम से और भी प्रभावी रूप में देखा गया।
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