नई दिल्ली , दिसंबर 09 -- देश में टीबी मुक्त भारत अभियान (राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम) को और प्रभावी बनाने के लिए सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। यह कार्यक्रम पूरे देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टीबी के अज्ञात मामलों की पहचान, टीबी से होने वाली मौतों में कमी और नये संक्रमणों को रोकना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि सरकार का लक्ष्य समुदाय की मदद, आधुनिक जांच तकनीक और पोषण सहायता के माध्यम से टीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से प्रगति करना है।

इस अभियान के तहत संवेदनशील आबादी की पहचान कर उन्हें छाती का एक्स-रे, तथा सभी संभावित मामलों के लिए न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (एनएएटी) उपलब्ध कराया जा रहा है। जांच में पुष्टि होने पर मरीजों को तुरंत और सही उपचार शुरू किया जाता है। उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए विशेष टीबी देखभाल भी प्रदान की जा रही है।

देश भर में टीबी रोगियों का पूरा आंकड़ा निक्षय पोर्टल के माध्यम से दर्ज किया जाता है, जिससे इलाज, फॉलो-अप और सहायता वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं। टीबी के लक्षण, रोकथाम और समय पर इलाज के महत्व को समझाने के लिए बड़े पैमाने पर सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान चलाए जा रहे हैं।

जनभागीदारी गतिविधियों में स्कूलों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ियों, स्थानीय एनजीओ और नागरिक समाज संगठनों को जोड़ा गया है, जिससे बीमारी के खिलाफ सामुदायिक प्रयास मजबूत हुए हैं।

टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने 1 नवंबर 2024 से निक्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति माह कर दी है। यह सहायता पूरी उपचार अवधि तक दी जाएगी।

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