नयी दिल्ली , दिसंबर 05 -- लोकसभा में गुरुवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के हाल के फैसले से देश के करीब 25 लाख शिक्षकों के भविष्य अधर में लटकने का मामला उठाया गया और सरकार से अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की गयी।

शिव सेना के धैर्यशील संभाजीराव माने ने शून्यकाल के दौरान कहा कि देश भर के शिक्षकों के प्रश्न को आज बहुत ही गंभीरता से देखने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर देश के 25 लाख शिक्षकों का भविष्य निर्भर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा को लागू किया गया जिसमें पहले भर्ती किये गये शिक्षक इस परीक्षा से बाहर थे लेकिन अब देश भर के सभी शिक्षक जो 53 साल से नीचे के हैं उनके लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है। अगर कोई शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं करेगा तो उसे नौकरी से हटा दिया जाएगा। केंद्र सरकार से आग्रह है कि यह सभी शिक्षक अपने स्थानिक परीक्षा पास करके भर्ती हुए हैं तो केंद्र सरकार उनके तरफ से पार्टी बनकर सुप्रीम कोर्ट में जाये ताकि शिक्षकों के साथ कोई अन्याय नहीं हो।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित