टिहरी , फरवरी 20 -- उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जनपद में मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरकता कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं को शुक्रवार को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया गया।

यह कार्यक्रम कृषि निदेशालय, उत्तराखण्ड, देहरादून के निर्देश पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित किया गया।

कार्यक्रम के तहत जिले के 169 ग्रामों से 10,500 मृदा नमूनों के परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मृदा परीक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 17 विद्यालयों का चयन किया गया, जिनमें केन्द्रीय विद्यालय सोरखण्ड और जवाहर नवोदय विद्यालय पोखाल सहित अन्य राजकीय इंटर कॉलेज शामिल हैं।

इन विद्यालयों के कुल 1006 छात्र-छात्राओं को कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने पीपीटी के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक विधि से मृदा नमूना संग्रहण, परीक्षण की आवश्यकता, संतुलित उर्वरक उपयोग और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने से फसल उत्पादन बढ़ता है, किसानों की आय में सुधार होता है और खेतों की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।

कार्यक्रम के तहत सभी चयनित विद्यालयों को मृदा परीक्षण किट उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक विद्यालय 50 मृदा नमूने एकत्र कर विद्यालय स्तर पर परीक्षण करेगा, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान मिल सके।

कृषि विभाग के अनुसार इस पहल से युवाओं में वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे भविष्य में किसानों को मृदा परीक्षण के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

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