झुंझुनू , दिसम्बर 03 -- राजस्थान में झुंझुनू जिले में छोटी स्वास्थ्य इकाईयों में मां-बच्चों की सेहत से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाएं बहुत कमजोर होने से जिला अस्पतालों पर भार बढ़ गया है।
उप-जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जैसी छोटी स्वास्थ्य इकाइयां लगातार गर्भवती महिलाओं को बड़े अस्पतालों में भेज रही हैं। इसके चलते जिले के आधे से अधिक प्रसव का भार अकेले राजकीय भगवानदास खेतान (बीडीके) अस्पताल को झेलना पड़ रहा है। इससे न केवल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोझ बढ़ा है, बल्कि गरीब और ग्रामीण गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम भी बढ़ गया है।
स्थिति यह है कि छोटे अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। जिससे मरीजों को बेवजह दूर के बड़े अस्पताल में जाना पड़ रहा है। राजकीय बीडीके अस्पताल में जनवरी 2025 से 24 अक्टूबर तक 2629 प्रसव हुए हैं, जिनमें 1565 सामान्य और 964 शल्य चिकित्सा के जरिए हुए।
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र भांबू ने बताया कि अस्पताल में हुए कुल प्रसव मामलों में से 36 प्रतिशत से अधिक ऐसे मामले हैं जो जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से भेजे गये हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को बड़े अस्पतालों में भेजने की मजबूरी के कारण उन पर लगातार बोझ बना रहता है।
उन्होंने बताया कि जिले की प्रसव सेवाओं की सबसे गंभीर स्थिति 35 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर है। अधिकतर केंद्र गर्भवती महिलाओं को उच्च जोखिम का बताकर सीधे जिला अस्पताल भेज रहे रहे हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार कई सीएचसी ऐसे हैं जहाँ एक भी प्रसव दर्ज नहीं हुआ है। इस लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले भी कई नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। सरकारी अस्पतालों में बिस्तर न मिलने या कहीं और भेजे जाने के डर से कई गर्भवती महिलाएं अब निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं। इन निजी अस्पतालों में शल्य चिकित्सा प्रसव को अधिक बढ़ावा मिल रहा है।
उप जिला अस्पताल खेतड़ी में प्रसव का करीब आधा हिस्सा बड़े अस्पताल भेजा जाता है। यहां के दोनों अस्पतालों में शल्य चिकित्सा प्रसव का आंकड़ा शून्य होना यह दर्शाता है कि उच्च जोखिम वाले मामलों को स्थानीय स्तर पर संभाला ही नहीं जा रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि इन केंद्रों पर ऑपरेशन थिएटर की सुविधा या प्रशिक्षित विशेषज्ञों का उपयोग नहीं हो रहा है।
प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. महेंद्र कुमार सबलानिया ने बताया कि उनके पास ब्लॉक और अन्य अस्पतालों से भेजे गये मामलों का कोई अलग से रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। क्योंकि सभी महिलाओं की नये पंजीकरण की पर्ची कटवाई गई है।
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