रांची , दिसम्बर 11 -- झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को 11 से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा (जेपीएससी) परीक्षा में सफल होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किए गए 10 अभ्यर्थियों की याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि याचिका दायर करने वाले आठ अभ्यर्थियों को तुरंत नियुक्त कर उनकी जॉइनिंग कराई जाए और उन्हें ट्रेनिंग के लिए भेजा जाए।

जस्टिस आनंदा सेन की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। जिन अभ्यर्थियों ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है, उनमें -जितेंद्र रजक, सूरज कुमार यादव, नीरज कुमार, आशुतोष कुमार, सुदिति सुमन, रूपाली रोशन, सूरज कुमार और रूपेंद्र प्रसाद शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने बहस की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आयोग ने कुल 10 सफल अभ्यर्थियों को केवल इस आधार पर नियुक्ति सूची से बाहर कर दिया था कि हाईकोर्ट के एक अन्य मामले में नौ सीटें आरक्षित रखी गई हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यह निर्णय पूरी तरह तर्कहीन और गलत था, क्योंकि जिन अभ्यर्थियों को हटाया गया, वे अपने-अपने वर्ग में उच्च मेरिट में थे और अधिक अंक प्राप्त कर चयनित हुए थे। अधिवक्ता ने कहा कि यदि नौ सीटें सुरक्षित रखनी थीं, तो यह कदम कम अंक वालों के मामले में उठाया जाना चाहिए था, न कि अधिक अंक लाने वाले योग्य अभ्यर्थियों पर।

हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के तर्कों को स्वीकारते हुए राज्य सरकार को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इन आठ अभ्यर्थियों की नियुक्ति में देरी नहीं होनी चाहिए और उन्हें तुरंत जॉइनिंग देकर प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाए।

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