रांची , दिसंबर 09 -- झारखंड विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारू रूप से चली।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धान खरीद के लिए एमएसपी सिर्फ 2450 किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की पार्टी और महागठबंधन की ओर से चुनाव के पहले धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3200 रुपये प्रति क्विंटल करने का वादा किया गया था। लेकिन विपक्षी दल के हंगामे के बावजूद 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जो जनता के साथ वादाखिलाफी है।
भाजपा के बाबूलाल मरांडी ने मेडिकल काउंसलिंग में हो रही घपलेबाजी का भी मामला उठाया। श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार को एमबीबीएस एडमिशन प्रोसेस को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से लिंक करना था। एनटीए टेस्ट लेकर बोर्ड को रिजल्ट भेज देता है और फिर यह काउंसेलिंग करते हैं। एनटीए की रिजल्ट शीट के साथ इन्हें अपना लिंक जोड़ना चाहिए लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने झारखंड संयुक्त परीक्षा पर्षद में पदस्थापित पदाधिकारियों को वहां से हटाने की मांग की और पूरे मामले में सीबीआई जांच की मांग की।
प्रश्नकाल शुरू होने पर भाजपा विधायक कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने बालू घाटों की नीलामी का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि माइंस डेवलपमेंट ऑपरेटर (एमडीओ) का चयन कम दर पर किए जाने के कारण राज्य को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बालू खनिज से प्राप्त राजस्व की तुलना में अवैध खनन से दंड के रूप में राशि मिल रही है।
इसके जवाब में प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि एमडीओ का कम दर पर चयन होने से राशि के नुकसान की बात बेबुनियाद है बल्कि इससे सरकार को फायदा होता है। उन्होंने दावा किया के राज्य में 374 घाट ऐसे हैं, जहां केवल 100 रु में 100 सीएफटी बालू ग्राम सभा के माध्यम से दिया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि पेसा नियमावली लागू नहीं होने की वजह से हाईकोर्ट के आदेश पर बालू घाट की नीलामी पर रोक लगी हुई है फिर भी प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास के निर्माण के लिए बालू की कोई कमी नहीं है।
इस पर भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने मंत्री से पूछा कि उन्हें बताना चाहिए कि किस जिला और किस शहर में 100 रु में 100 सीएफटी बालू मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो एक ट्रैक्टर की कीमत महज 200 रु होनी चाहिए क्योंकि एक ट्रैक्टर में 200 सीएफटी बालू लादा जाता है। विपक्ष की ओर से मंत्री से कहा गया कि उन्हें बालू घाट से हुए राजस्व का डाटा सार्वजनिक करना चाहिए।
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