रांची , जनवरी 07 -- झारखंड की राजधानी रांची के डोरंडा स्थित नेपाल हाउस में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) की राज्य टीबी फोरम की बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड ने की। इस बैठक में एनएचएम के एमडी शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवायें डॉ. सिद्धार्थ सान्याल और राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार के साथ कई विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में संभावित टीबी मामलों की संख्या कम है, वहां कारणों की समीक्षा कर जांच की संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने सभी सरकारी विभागों को अपने-अपने विभागों के अंतर्गत आने वाले संवेदनशील समूहों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करते हुए निक्षय पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि के निर्देश दिए।

इसके साथ उद्योग विभाग को नि-क्षय मित्र पहल के तहत टीबी मरीजों को गोद लेने एवं सहयोग प्रदान करने हेतु आवश्यक पत्राचार करने का निर्देश दिया। राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत जोखिम वाले समूहों एवं क्षेत्रों में निक्षय वाहन, मोबाइल मेडिकल यूनिट एवं हैंड-हेल्ड एक्स-रे के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की खोज तेज की जा रही है।

बैठक में बताया गया कि धनबाद में कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (सीडीएसटी) लैब पूर्ण रूप से क्रियाशील हो चुकी है, जिससे आईआरएल इटकी, रांची का भार कम हुआ है। रिम्स में सीडीएसटी लैब का सुदृढ़ीकरण पूरा कर लिया गया है, जिसका उद्घाटन शीघ्र किया जाएगा। डाक विभाग के सहयोग से खारिज का नमूना एवं परिवहन सेवा की शुरुआत रांची में की गई है, जिसे 15 जनवरी 2026 तक पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

राज्य के 18 जिलों में पंचायत टीबी फोरम का गठन किया जा चुका है और रांची, चतरा, लातेहार, जमशेदपुर, बोकारो, कोडरमा एवं गिरिडीह जिलों में हैंड-हेल्ड एक्स-रे उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग को बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देश दिया गया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनभागीदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (एनएएटी) जांच की संख्या बढ़ाने, सभी पंचायतों में टीबी फोरम के गठन, निक्षय मित्रों की संख्या में वृद्धि तथा टीबी मरीजों को अतिरिक्त पोषण सहायता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

राज्य में चरणबद्ध तरीके से 134 अतिरिक्त हैंड-हेल्ड एक्स-रे की तैनाती, 24 जिलों में ट्रूनेट मशीनों की खरीद, उपकरणों के एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (एएमसी), नियमित जिला टीबी पदाधिकारियों की नियुक्ति एवं आगामी 100 दिवसीय टीबी अभियान की तैयारी पर भी चर्चा की गई।

बैठक में डाक विभाग, खाद्य विभाग, उपभोक्ता मामले विभाग, श्रम विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, झारखंड चौंबर ऑफ कॉमर्स, परिवहन विभाग, पंचायती राज विभाग सहित विभिन्न विभागों के राज्यस्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। राज्य सरकार टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सभी विभागों एवं समाज के सहयोग से टीबी उन्मूलन अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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