रांची , फरवरी 10 -- झारखंड में निकाय चुनाव को लेकर निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए नकदी, शराब अथवा अन्य वस्तुओं के वितरण को दंडनीय अपराध बताते हुए प्रशासन ने आम नागरिकों से सतर्क रहने और सहयोग करने की अपील की है। प्रशासन के अनुसार, चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर नजर रखने के लिए प्रत्येक थाना क्षेत्र में विशेष उड़नदस्ते (फ्लाइंग स्क्वॉड) का गठन किया गया है। ये टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि चुनाव को प्रभावित करने वाले प्रयासों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चुनाव अवधि के दौरान यदि कोई व्यक्ति किसी निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में नकदी लेकर चलता पाया जाता है, तो उससे धन के स्रोत और उसके उपयोग से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा जाएगा। संतोषजनक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में नकदी को जब्त किया जा सकता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों, उनके कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों पर भी समान रूप से लागू होगी। किसी भी स्तर पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नकदी के साथ-साथ शराब, उपहार सामग्री या अन्य किसी प्रकार की वस्तुओं का वितरण भी अपराध की श्रेणी में आएगा।
आम नागरिकों से अपील करते हुए प्रशासन ने कहा है कि वे अनावश्यक रूप से बड़ी मात्रा में नकदी लेकर यात्रा करने से बचें। यदि किसी कारणवश नकदी ले जाना आवश्यक हो, तो संबंधित दस्तावेज अपने पास अवश्य रखें, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। उनमें से पैन कार्ड और उसकी प्रति, व्यापार निबंधन प्रमाण पत्र (यदि लागू हो),बैंक पासबुक या बैंक स्टेटमेंट, जिसमें नकदी निकासी का विवरण हो,नियमित नकद लेन-देन वाले व्यवसाय के लिए कैश बुक की प्रति, धन के उपयोग से संबंधित प्रमाण, जैसे विवाह निमंत्रण पत्र या अस्पताल में भर्ती से जुड़े दस्तावेज जैसे दस्तावेज रखना जरूरी है।
प्रशासन ने लोगों से यह भी आग्रह किया है कि यदि कहीं मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नकदी, शराब या अन्य वस्तुओं का वितरण होता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस, निर्वाचन अधिकारियों या नियंत्रण कक्ष को दें। नागरिकों के सहयोग से ही स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किया जा सकता है।
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