रांची , दिसंबर 29 -- झारखंड के लिए वर्ष 2025 हर दृष्टि से अनुकूल और सकारात्मक बदलावों का साक्षी रहा।

राजनीति, खेल, शिक्षा और नक्सल समस्या-चारों मोर्चों पर राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की, जिसने झारखंड को विकास की नई दिशा दी।

राजनीतिक स्तर पर वर्ष 2025 में स्थिरता और प्रशासनिक सक्रियता देखने को मिली। सरकार ने विकास योजनाओं को गति दी और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया। हेमंत सोरेन सरकार के लिए वर्ष 2025 सत्ता के लिहाज से सुकून भरा तो रहा, लेकिन यह साल विवादों, आंदोलनों और तीखे राजनीतिक टकराव का भी गवाह बना।

एक ओर राज्य स्थापना दिवस जैसे आयोजनों के जरिए सरकार ने उपलब्धियों और एकता का संदेश दिया, वहीं डीजीपी विवाद, बालू संकट, भर्ती घोटाले और केंद्र सरकार से फंड को लेकर टकराव ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दिया। विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश होती रही।

साल का सबसे बड़ा विवाद डीजीपी अनुराग गुप्ता को सेवानिवृत्ति के बाद मिले दो साल के एक्सटेंशन को लेकर रहा। केंद्र सरकार ने इसे असंवैधानिक करार दिया, जबकि भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इसे कोर्ट में चुनौती दी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, हालांकि नवंबर में अनुराग गुप्ता के इस्तीफे के साथ यह विवाद थम गया। इसके बावजूद यह मामला पुलिस प्रशासन के कथित राजनीतिकरण का प्रतीक बन गया।

राजनीतिक दलों के भीतर भी हलचल तेज रही। विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद भाजपा ने बाबूलाल मरांडी पर भरोसा बनाए रखा और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष दोनों पदों पर बनाए रखा। वहीं ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की भाजपा में वापसी ने विपक्ष को नया तेवर दिया। दूसरी ओर घाटशिला उपचुनाव में झामुमो प्रत्याशी की जीत ने पार्टी का मनोबल बढ़ाया और निकाय चुनाव का रास्ता साफ हुआ।

राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आदिवासी हितों की जंग छिड़ी। सत्ता पक्ष ने इसे आदिवासी विरोधी बताया, जबकि भाजपा ने अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठाया। सरना स्थल विवाद, कुड़मी आंदोलन, हजारीबाग हिंसा और सांप्रदायिक तनाव ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी।

आर्थिक मोर्चे पर विपक्ष ने फंड संकट का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने नवंबर में 25वें स्थापना दिवस पर कई योजनाएं लॉन्च कर जवाब दिया। रोजगार के मोर्चे पर सरकार ने एक साल पूरे होने पर करीब 8,800 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे।

साल का अंत झामुमो के लिए भावनात्मक रहा। दिशोम गुरु शिबू सोरेन और मंत्री रामदास सोरेन के निधन से पार्टी शोक में डूबी, वहीं 13वें महाधिवेशन में हेमंत सोरेन के पार्टी अध्यक्ष बनने से संगठनात्मक बदलाव भी दर्ज हुआ।

खेल के क्षेत्र में झारखंड ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। साल 2025 झारखंड के खेल इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ। यह वर्ष केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर खुद को एक मजबूत खेल केंद्र के रूप में स्थापित किया।

पहली बार ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड ने 18 दिसंबर 2025 को हरियाणा को 69 रनों से हराकर सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब जीता। पुणे में खेले गए फाइनल में झारखंड ने 3 विकेट पर 262 रनों का विशाल स्कोर बनाया, जिसमें किशन (101 रन) की शानदार पारी खेली, जिसके बाद इंडिया टीम में उसका चयन भी हुआ। वहीं खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में झारखंड के खिलाड़ियों ने कई खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन कर राज्य की खेल प्रतिभा को देशभर में पहचान दिलाई। एथलेटिक्स, हॉकी और तीरंदाजी जैसे खेलों में पदक जीतकर खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि झारखंड खेल प्रतिभाओं की खान है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रांची में आयोजित साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप ने राज्य की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी। राज्य सरकार द्वारा आयोजित खेलो झारखंड 2025 प्रतियोगिता ने जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत किया। जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में हजारों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो और तीरंदाजी जैसे खेलों में खिलाड़ियों ने दमखम दिखाया।

व्यक्तिगत उपलब्धियों में झारखंड पुलिस की जवान विनीता उरांव ने ऑल इंडिया पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर में रजत पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। वहीं 30 नवंबर 2025 को रांची के जेएससीए स्टेडियम में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए वनडे मैच ने झारखंड को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया।

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