रांची , दिसंबर 16 -- झारखंड में लंबे समय से लंबित छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर राज्य के लाखों छात्रों के लिए राहत की उम्मीद जगी है।
राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा को इस संबंध में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री रामदास आठवले से सकारात्मक आश्वासन मिला है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने बकाया राशि के भुगतान को लेकर विभागीय सचिव को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है।
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि मंगलवार को उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले से मुलाकात कर झारखंड के छात्रों की गंभीर समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। इस दौरान उन्होंने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि केंद्रांश की राशि समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण ओबीसी और एससी वर्ग के हजारों छात्रों की छात्रवृत्ति अटकी हुई है। इस पर केंद्रीय राज्य मंत्री ने फोन पर ही विभागीय सचिव को मामले का शीघ्र समाधान निकालने का निर्देश दिया।
ज्ञापन में मंत्री लिंडा ने उल्लेख किया है कि ओबीसी और एससी वर्ग के प्री-मैट्रिक (कक्षा 9वीं-10वीं) और पोस्ट मैट्रिक छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्ति का पूर्ण केंद्रांश अब तक प्राप्त नहीं हो सका है। इसके कारण राज्यभर में छात्र आंदोलनरत हैं। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 21 अक्टूबर 2024 और 11 जून 2025 को केंद्र सरकार को पत्र भेजा जा चुका है। वहीं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 29 दिसंबर 2023, 5 जुलाई 2024 और 18 जुलाई 2025 को पत्राचार किया गया है।
बकाया छात्रवृत्ति को लेकर झारखंड में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। आजसू पार्टी, जेएलकेएम के बाद भाजपा युवा मोर्चा भी इस मुद्दे पर आज सड़कों पर उतरा। बीते शीतकालीन सत्र के दौरान यह मामला विधानसभा के भीतर और बाहर भी जोरशोर से उठा था।
सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि पोस्ट मैट्रिक ओबीसी छात्रवृत्ति के तहत वर्ष 2023-24 में 271.37 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जबकि केंद्र से मात्र 77.31 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसी तरह 2024-25 में 253.21 करोड़ की मांग के मुकाबले सिर्फ 33.57 करोड़ रुपये मिले। वहीं 2025-26 में 370.17 करोड़ रुपये की मांग के बावजूद एक भी पैसा नहीं मिला।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। वर्ष 2023-24 में 67.88 करोड़ रुपये की मांग के बदले केवल 7.35 करोड़ रुपये मिले। 2024-25 में 66.14 करोड़ की मांग पर 11.61 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि 2025-26 के लिए मांगे गए 45.91 करोड़ रुपये के बदले मात्र 3.95 करोड़ रुपये ही केंद्र से मिले।
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